फागुन के दिन चार phaagun ke din chaar फागुन के दिन चार
चलो सहेली बाग में, फागुन के दिन
चार
ऋतु
बसंत की आ गई, करके नव शृंगार।
करके
नव शृंगार, केसरी आँचल ओढ़ा
लाए
पुष्प गुलाल, ढाक भी रंग कटोरा।
पर्व
मनाया साथ, सभी ने होली खेली
फागुन
के दिन चार, बाग में चलो सहेली
होली आई झूमकर, चढ़ा रंग का
रोग।
हर
होटल हर माल पर, छाए छप्पन भोग।
छाए
छप्पन भोग, घरों में कौन पकाए
निकल
पड़े हैं साथ, सभी सड़कों पर छाए।
पकवानों
के संग, भंग
की
chalo sahelee baag men, phaagun ke din
chaar
riitu
basant kee aa gaee, karake naw shriingaar
karake
naw shriingaar, kesaree aanchal oढ़aa
laae
pushp gulaal, dhaak bhee rang katoraa
parv
manaayaa saath, sabhee ne holee khelee
phaagun
ke din chaar, baag men chalo sahelee
holee aaee jhoomakar, chढ़aa rang kaa
rog
har
hotal har maal par, chaae chappan bhog
chaae
chappan bhog, gharon men kaun pakaae
nikal
pade hain saath, sabhee sadakon par chaae
pakawaanon
ke sang, bhang
kee
चलो सहेली बाग में, फागुन के दिन
चार
ऋतु
बसंत की आ गई, करके नव शृंगार।
करके
नव शृंगार, केसरी आँचल ओढ़ा
लाए
पुष्प गुलाल, ढाक भी रंग कटोरा।
पर्व
मनाया साथ, सभी ने होली खेली
फागुन
के दिन चार, बाग में चलो सहेली
होली आई झूमकर, चढ़ा रंग का
रोग।
हर
होटल हर माल पर, छाए छप्पन भोग।
छाए
छप्पन भोग, घरों में कौन पकाए
निकल
पड़े हैं साथ, सभी सड़कों पर छाए।
पकवानों
के संग, भंग
की