कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २८ / ६३ № 28 of 63 रचना २८ / ६३
१९ मार्च २०१३ 19 March 2013 १९ मार्च २०१३

फागुन के दिन चार phaagun ke din chaar फागुन के दिन चार

चलो सहेली बाग में, फागुन के दिन

चार

॥

ऋतु

बसंत की आ गई, करके नव शृंगार।

॥

करके

नव शृंगार, केसरी आँचल ओढ़ा

॥

लाए

पुष्प गुलाल, ढाक भी रंग कटोरा।

॥

पर्व

मनाया साथ, सभी ने होली खेली

॥

फागुन

के दिन चार, बाग में चलो सहेली

॥

होली आई झूमकर, चढ़ा रंग का

रोग।

॥

हर

होटल हर माल पर, छाए छप्पन भोग।

॥

छाए

छप्पन भोग, घरों में कौन पकाए

॥

निकल

पड़े हैं साथ, सभी सड़कों पर छाए।

॥

पकवानों

के संग, भंग

की

chalo sahelee baag men, phaagun ke din

chaar

·

riitu

basant kee aa gaee, karake naw shriingaar

·

karake

naw shriingaar, kesaree aanchal oढ़aa

·

laae

pushp gulaal, dhaak bhee rang katoraa

·

parv

manaayaa saath, sabhee ne holee khelee

·

phaagun

ke din chaar, baag men chalo sahelee

·

holee aaee jhoomakar, chढ़aa rang kaa

rog

·

har

hotal har maal par, chaae chappan bhog

·

chaae

chappan bhog, gharon men kaun pakaae

·

nikal

pade hain saath, sabhee sadakon par chaae

·

pakawaanon

ke sang, bhang

kee

चलो सहेली बाग में, फागुन के दिन

चार

॥

ऋतु

बसंत की आ गई, करके नव शृंगार।

॥

करके

नव शृंगार, केसरी आँचल ओढ़ा

॥

लाए

पुष्प गुलाल, ढाक भी रंग कटोरा।

॥

पर्व

मनाया साथ, सभी ने होली खेली

॥

फागुन

के दिन चार, बाग में चलो सहेली

॥

होली आई झूमकर, चढ़ा रंग का

रोग।

॥

हर

होटल हर माल पर, छाए छप्पन भोग।

॥

छाए

छप्पन भोग, घरों में कौन पकाए

॥

निकल

पड़े हैं साथ, सभी सड़कों पर छाए।

॥

पकवानों

के संग, भंग

की

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗