फिर से आओ राम जी... phir se aao raam jee फिर से आओ राम जी...
फिर से आओ राम जी तुम्हें पुकारे
देश।
मर्यादा के मनुष में चिह्न नहीं अब
शेष।
चिह्न नहीं अब शेष, संस्कृति भूले
अपनी
रही साथ मद, लोभ,
स्वार्थ की माला जपनी।
काटो तम का जाल, ज्ञान का दीप
जलाओ
तुम्हें पुकारे देश, राम जी! फिर से
आओ।
कलियुग में श्री राम से, पुत्र कहाँ हैं
आज।
पित्राज्ञा से वन गमन, किया छोडकर ताज।
किया छोडकर ताज, राजसी
phir se aao raam jee tumhen pukaare
desh
maryaadaa ke manush men chihn naheen ab
shesh
chihn naheen ab shesh, sanskriiti bhoole
apanee
rahee saath mad, lobh,
svaarth kee maalaa japanee
kaato tam kaa jaal, jnaan kaa deep
jalaao
tumhen pukaare desh, raam jee! phir se
aao
kaliyug men shree raam se, putr kahaan hain
aaj
pitraajnaa se wan gaman, kiyaa chodakar taaj
kiyaa chodakar taaj, raajasee
फिर से आओ राम जी तुम्हें पुकारे
देश।
मर्यादा के मनुष में चिह्न नहीं अब
शेष।
चिह्न नहीं अब शेष, संस्कृति भूले
अपनी
रही साथ मद, लोभ,
स्वार्थ की माला जपनी।
काटो तम का जाल, ज्ञान का दीप
जलाओ
तुम्हें पुकारे देश, राम जी! फिर से
आओ।
कलियुग में श्री राम से, पुत्र कहाँ हैं
आज।
पित्राज्ञा से वन गमन, किया छोडकर ताज।
किया छोडकर ताज, राजसी