कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ३१ / ६३ № 31 of 63 रचना ३१ / ६३
१९ अप्रैल २०१३ 19 April 2013 १९ अप्रैल २०१३

फिर से आओ राम जी... phir se aao raam jee फिर से आओ राम जी...

फिर से आओ राम जी तुम्हें पुकारे

देश।

मर्यादा के मनुष में चिह्न नहीं अब

शेष।

चिह्न नहीं अब शेष, संस्कृति भूले

अपनी

रही साथ मद, लोभ,

स्वार्थ की माला जपनी।

काटो तम का जाल, ज्ञान का दीप

जलाओ

तुम्हें पुकारे देश, राम जी! फिर से

आओ।

कलियुग में श्री राम से, पुत्र कहाँ हैं

आज।

पित्राज्ञा से वन गमन, किया छोडकर ताज।

किया छोडकर ताज, राजसी

phir se aao raam jee tumhen pukaare

desh

·

maryaadaa ke manush men chihn naheen ab

shesh

·

chihn naheen ab shesh, sanskriiti bhoole

apanee

·

rahee saath mad, lobh,

svaarth kee maalaa japanee

·

kaato tam kaa jaal, jnaan kaa deep

jalaao

·

tumhen pukaare desh, raam jee! phir se

aao

·

kaliyug men shree raam se, putr kahaan hain

aaj

·

pitraajnaa se wan gaman, kiyaa chodakar taaj

·

kiyaa chodakar taaj, raajasee

फिर से आओ राम जी तुम्हें पुकारे

देश।

मर्यादा के मनुष में चिह्न नहीं अब

शेष।

चिह्न नहीं अब शेष, संस्कृति भूले

अपनी

रही साथ मद, लोभ,

स्वार्थ की माला जपनी।

काटो तम का जाल, ज्ञान का दीप

जलाओ

तुम्हें पुकारे देश, राम जी! फिर से

आओ।

कलियुग में श्री राम से, पुत्र कहाँ हैं

आज।

पित्राज्ञा से वन गमन, किया छोडकर ताज।

किया छोडकर ताज, राजसी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗