गर्म धूप में ढूँढ रहे पग.... garm dhoop men dhoondh rahe pag गर्म धूप में ढूँढ रहे पग....
गर्म धूप में ढूँढ रहे पग नर्म छाँव का शीतल टुकड़ा।
फटी पुरानी मैली झोली कंधे पर लटकाकर चलते। घूरे से ख्वाबों के मोती घूर-घूर कर दिन भर चुनते।
झर-झर बहती स्वेद धार से धुल जाता है इनका मुखड़ा। संग सूर्य के सूर्यमुखी ये छोड़ बिछौना उठ चल देते । तपती धरती, पैर फफोले तनिक नहीं ये विचलित होते।
दीन पुत्र यह नहीं जानते क्योंकर इनका बचपन उजड़ा। भरती जब साधों की झोली इनकी किस्मत पर इठलाती। अंगारों सी
garm dhoop men dhoondh rahe pag narm chaanv kaa sheetal tukadaa
phatee puraanee mailee jholee kandhe par latakaakar chalate ghoore se khvaabon ke motee ghoor-ghoor kar din bhar chunate
jhar-jhar bahatee sved dhaar se dhul jaataa hai inakaa mukhadaa sang soory ke sooryamukhee ye chod bichaunaa uth chal dete tapatee dharatee, pair phaphole tanik naheen ye wichalit hote
deen putr yah naheen jaanate kyonkar inakaa bachapan ujadaa bharatee jab saadhon kee jholee inakee kismat par ithalaatee angaaron see
गर्म धूप में ढूँढ रहे पग नर्म छाँव का शीतल टुकड़ा।
फटी पुरानी मैली झोली कंधे पर लटकाकर चलते। घूरे से ख्वाबों के मोती घूर-घूर कर दिन भर चुनते।
झर-झर बहती स्वेद धार से धुल जाता है इनका मुखड़ा। संग सूर्य के सूर्यमुखी ये छोड़ बिछौना उठ चल देते । तपती धरती, पैर फफोले तनिक नहीं ये विचलित होते।
दीन पुत्र यह नहीं जानते क्योंकर इनका बचपन उजड़ा। भरती जब साधों की झोली इनकी किस्मत पर इठलाती। अंगारों सी