कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११० / १६३ № 110 of 163 रचना ११० / १६३
१० जुलाई २०१५ 10 July 2015 १० जुलाई २०१५

बाँस की कुर्सी baans kee kursee बाँस की कुर्सी

बालकनी के कोने मैंनेजब से रखी बाँस की कुर्सी

धूप बैठ इसपर खुश

होती

बरखा अपना मुखड़ा

धोती

शीत शॉल धरकर

विराजती

रैन बिछाकर तारे

सोती

हर मौसम ने बारी-बारीछककर चखी, बाँस की कुर्सी

जब यह बाँस लचीला

होगा

इसको श्रम ने छीला

होगा

अंग-अंग में प्राण

पिरोकर

रंग दे दिया पीला

होगा

एक नज़र में मुझे भा गईजिस दिन लखी, बाँस की कुर्सी

नित्य चाय

baalakanee ke kone mainnejab se rakhee baans kee kursee

·

dhoop baith isapar khush

hotee

·

barakhaa apanaa mukhadaa

dhotee

·

sheet shॉl dharakar

wiraajatee

·

rain bichaakar taare

sotee

·

har mausam ne baaree-baareechakakar chakhee, baans kee kursee

·

jab yah baans lacheelaa

hogaa

·

isako shram ne cheelaa

hogaa

·

ang-ang men praan

pirokar

·

rang de diyaa peelaa

hogaa

·

ek nazar men mujhe bhaa gaeejis din lakhee, baans kee kursee

·

nity chaay

बालकनी के कोने मैंनेजब से रखी बाँस की कुर्सी

धूप बैठ इसपर खुश

होती

बरखा अपना मुखड़ा

धोती

शीत शॉल धरकर

विराजती

रैन बिछाकर तारे

सोती

हर मौसम ने बारी-बारीछककर चखी, बाँस की कुर्सी

जब यह बाँस लचीला

होगा

इसको श्रम ने छीला

होगा

अंग-अंग में प्राण

पिरोकर

रंग दे दिया पीला

होगा

एक नज़र में मुझे भा गईजिस दिन लखी, बाँस की कुर्सी

नित्य चाय

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗