कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११० / १६४ № 110 of 164 रचना ११० / १६४
१० जुलाई २०१५ 10 July 2015 १० जुलाई २०१५

बाँस की कुर्सी baans kee kursee बाँस की कुर्सी

बालकनी के कोने मैंनेजब से रखी बाँस की कुर्सी

॥

धूप बैठ इसपर खुश

होती

॥

बरखा अपना मुखड़ा

धोती

॥

शीत शॉल धरकर

विराजती

॥

रैन बिछाकर तारे

सोती

॥

हर मौसम ने बारी-बारीछककर चखी, बाँस की कुर्सी

॥

जब यह बाँस लचीला

होगा

॥

इसको श्रम ने छीला

होगा

॥

अंग-अंग में प्राण

पिरोकर

॥

रंग दे दिया पीला

होगा

॥

एक नज़र में मुझे भा गईजिस दिन लखी, बाँस की कुर्सी

॥

नित्य चाय

baalakanee ke kone mainnejab se rakhee baans kee kursee

·

dhoop baith isapar khush

hotee

·

barakhaa apanaa mukhadaa

dhotee

·

sheet shॉl dharakar

wiraajatee

·

rain bichaakar taare

sotee

·

har mausam ne baaree-baareechakakar chakhee, baans kee kursee

·

jab yah baans lacheelaa

hogaa

·

isako shram ne cheelaa

hogaa

·

ang-ang men praan

pirokar

·

rang de diyaa peelaa

hogaa

·

ek nazar men mujhe bhaa gaeejis din lakhee, baans kee kursee

·

nity chaay

बालकनी के कोने मैंनेजब से रखी बाँस की कुर्सी

॥

धूप बैठ इसपर खुश

होती

॥

बरखा अपना मुखड़ा

धोती

॥

शीत शॉल धरकर

विराजती

॥

रैन बिछाकर तारे

सोती

॥

हर मौसम ने बारी-बारीछककर चखी, बाँस की कुर्सी

॥

जब यह बाँस लचीला

होगा

॥

इसको श्रम ने छीला

होगा

॥

अंग-अंग में प्राण

पिरोकर

॥

रंग दे दिया पीला

होगा

॥

एक नज़र में मुझे भा गईजिस दिन लखी, बाँस की कुर्सी

॥

नित्य चाय

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗