दुनिया बड़ी कमाल की duniyaa badee kamaal kee दुनिया बड़ी कमाल की
दुनिया
बड़ी कमाल की, कहते हैं सब गोल।
रिश्ते
हों या प्रेम हो, सबका लगता मोल।
सबका
लगता मोल, हुई
हर बात दिखावा
सतही
मन इंसान, बन
गया एक छलावा।
ओढ़े
हुए नकाब, फिर
रहे ज्ञानी गुनिया
कहे
कल्पना गोल, बड़ी अद्भुत यह दुनिया।
दुःख
सागर जो मानते, दुनिया को
इंसान।
खुद
जोड़े उसने सभी, व्यर्थ साज सामान।
व्यर्थ
साज सामान, दुःखों का बोझ बढ़ाते
बरबादी
की ओर, कदम
फिर बढ़ते जाते।
भरते
duniyaa
badee kamaal kee, kahate hain sab gol
rishte
hon yaa prem ho, sabakaa lagataa mol
sabakaa
lagataa mol, huee
har baat dikhaawaa
satahee
man insaan, ban
gayaa ek chalaawaa
oढ़e
hue nakaab, phir
rahe jnaanee guniyaa
kahe
kalpanaa gol, badee adbhut yah duniyaa
duhkh
saagar jo maanate, duniyaa ko
insaan
khud
jode usane sabhee, wyarth saaj saamaan
wyarth
saaj saamaan, duhkhon kaa bojh bढ़aate
barabaadee
kee or, kadam
phir bढ़te jaate
bharate
दुनिया
बड़ी कमाल की, कहते हैं सब गोल।
रिश्ते
हों या प्रेम हो, सबका लगता मोल।
सबका
लगता मोल, हुई
हर बात दिखावा
सतही
मन इंसान, बन
गया एक छलावा।
ओढ़े
हुए नकाब, फिर
रहे ज्ञानी गुनिया
कहे
कल्पना गोल, बड़ी अद्भुत यह दुनिया।
दुःख
सागर जो मानते, दुनिया को
इंसान।
खुद
जोड़े उसने सभी, व्यर्थ साज सामान।
व्यर्थ
साज सामान, दुःखों का बोझ बढ़ाते
बरबादी
की ओर, कदम
फिर बढ़ते जाते।
भरते