कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना १५ / ६३ № 15 of 63 रचना १५ / ६३
२४ नवम्बर २०१२ 24 November 2012 २४ नवम्बर २०१२

दस्तक से पलकें खुलीं dastak se palaken khuleen दस्तक से पलकें खुलीं

दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर।

शीत खड़ी थी सामने,कुहरा था पुरजोर।

कुहरा था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ

बिछा था।

भूगत होकर सूर्य, न जाने कहाँ

छिपा था।

रहे ताकते राह, न आया दिनकर जब

तक

देखी सुंदर भोर, हुई कुहरे की

दस्तक।

शीत खड़ी है द्वार पर, धर कुहरे का

ताज।

ऋतु रानी का आज से होगा एकल राज।

होगा एकल राज, व्यर्थ है छिपकर रहना

स्वागत करिए मीत, कल्पना का है

dastak se palaken khuleen,dekhee sundar bhor

sheet khadee thee saamane,kuharaa thaa purajor

kuharaa thaa purajor, dhuaan hee dhuaan

bichaa thaa

·

bhoogat hokar soory, n jaane kahaan

chipaa thaa

·

rahe taakate raah, n aayaa dinakar jab

tak

·

dekhee sundar bhor, huee kuhare kee

dastak

·

sheet khadee hai dvaar par, dhar kuhare kaa

taaj

·

riitu raanee kaa aaj se hogaa ekal raaj

·

hogaa ekal raaj, wyarth hai chipakar rahanaa

·

svaagat karie meet, kalpanaa kaa hai

दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर।

शीत खड़ी थी सामने,कुहरा था पुरजोर।

कुहरा था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ

बिछा था।

भूगत होकर सूर्य, न जाने कहाँ

छिपा था।

रहे ताकते राह, न आया दिनकर जब

तक

देखी सुंदर भोर, हुई कुहरे की

दस्तक।

शीत खड़ी है द्वार पर, धर कुहरे का

ताज।

ऋतु रानी का आज से होगा एकल राज।

होगा एकल राज, व्यर्थ है छिपकर रहना

स्वागत करिए मीत, कल्पना का है

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗