कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना १४ / ६३ № 14 of 63 रचना १४ / ६३
२३ नवम्बर २०१२ 23 November 2012 २३ नवम्बर २०१२

कुछ दिन भाया कोहरा kuch din bhaayaa koharaa कुछ दिन भाया कोहरा

दस्तक

से पलकें खुलीं, देखी सुंदर

भोर।

शीत

खड़ी थी सामने, कुहरा था

पुरजोर।

कुहरा

था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ

बिछा था।

भूगत

होकर सूर्य, न जाने कहाँ

छिपा था।

रहे

काँपते गात, न आया दिनकर

जब तक

पर मन भाई भोर, और

कुहरे की दस्तक।

128)

दर पर आई शीत है, धर कुहरे का ताज।

ऋतु-रानी का आज से,

होगा एकल राज।

होगा

एकल राज, व्यर्थ है

छिपकर रहना

पट खोलो हे मीत, मान कुदरत का

dastak

se palaken khuleen, dekhee sundar

bhor

·

sheet

khadee thee saamane, kuharaa thaa

purajor

·

kuharaa

thaa purajor, dhuaan hee dhuaan

bichaa thaa

·

bhoogat

hokar soory, n jaane kahaan

chipaa thaa

·

rahe

kaanpate gaat, n aayaa dinakar

jab tak

·

par man bhaaee bhor, aur

kuhare kee dastak

·

128)

·

dar par aaee sheet hai, dhar kuhare kaa taaj

·

riitu-raanee kaa aaj se,

hogaa ekal raaj

·

hogaa

ekal raaj, wyarth hai

chipakar rahanaa

·

pat kholo he meet, maan kudarat kaa

दस्तक

से पलकें खुलीं, देखी सुंदर

भोर।

शीत

खड़ी थी सामने, कुहरा था

पुरजोर।

कुहरा

था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ

बिछा था।

भूगत

होकर सूर्य, न जाने कहाँ

छिपा था।

रहे

काँपते गात, न आया दिनकर

जब तक

पर मन भाई भोर, और

कुहरे की दस्तक।

128)

दर पर आई शीत है, धर कुहरे का ताज।

ऋतु-रानी का आज से,

होगा एकल राज।

होगा

एकल राज, व्यर्थ है

छिपकर रहना

पट खोलो हे मीत, मान कुदरत का

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗