कुछ दिन भाया कोहरा kuch din bhaayaa koharaa कुछ दिन भाया कोहरा
दस्तक
से पलकें खुलीं, देखी सुंदर
भोर।
शीत
खड़ी थी सामने, कुहरा था
पुरजोर।
कुहरा
था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ
बिछा था।
भूगत
होकर सूर्य, न जाने कहाँ
छिपा था।
रहे
काँपते गात, न आया दिनकर
जब तक
पर मन भाई भोर, और
कुहरे की दस्तक।
128)
दर पर आई शीत है, धर कुहरे का ताज।
ऋतु-रानी का आज से,
होगा एकल राज।
होगा
एकल राज, व्यर्थ है
छिपकर रहना
पट खोलो हे मीत, मान कुदरत का
dastak
se palaken khuleen, dekhee sundar
bhor
sheet
khadee thee saamane, kuharaa thaa
purajor
kuharaa
thaa purajor, dhuaan hee dhuaan
bichaa thaa
bhoogat
hokar soory, n jaane kahaan
chipaa thaa
rahe
kaanpate gaat, n aayaa dinakar
jab tak
par man bhaaee bhor, aur
kuhare kee dastak
128)
dar par aaee sheet hai, dhar kuhare kaa taaj
riitu-raanee kaa aaj se,
hogaa ekal raaj
hogaa
ekal raaj, wyarth hai
chipakar rahanaa
pat kholo he meet, maan kudarat kaa
दस्तक
से पलकें खुलीं, देखी सुंदर
भोर।
शीत
खड़ी थी सामने, कुहरा था
पुरजोर।
कुहरा
था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ
बिछा था।
भूगत
होकर सूर्य, न जाने कहाँ
छिपा था।
रहे
काँपते गात, न आया दिनकर
जब तक
पर मन भाई भोर, और
कुहरे की दस्तक।
128)
दर पर आई शीत है, धर कुहरे का ताज।
ऋतु-रानी का आज से,
होगा एकल राज।
होगा
एकल राज, व्यर्थ है
छिपकर रहना
पट खोलो हे मीत, मान कुदरत का