रक्षा बंधन पर्व पर rakshaa bandhan parv par रक्षा बंधन पर्व पर
रक्षा बंधन पर्व पर, बहना आई गाँव। हाथों में मेहँदी रची, और महावर पाँव। और महावर पाँव, चूड़ियों सजी कलाई। नैहर का लख नेह, भाग्य निज पर इतराई। बाँध रेशमी डोर, किया भाई का वंदन। बहना आई गाँव, मनाने रक्षा बंधन।आता सावन में सखी, राखी का त्यौहार। हर धागे से झाँकता, भ्रात-बहन का प्यार। भ्रात-बहन का प्यार, बाँध बहना खुश होतीरेशम की यह डोर, कीमती सबसे
rakshaa bandhan parv par, bahanaa aaee gaanv haathon men mehandee rachee, aur mahaawar paanv aur mahaawar paanv, choodiyon sajee kalaaee naihar kaa lakh neh, bhaagy nij par itaraaee baandh reshamee dor, kiyaa bhaaee kaa wandan bahanaa aaee gaanv, manaane rakshaa bandhanaataa saawan men sakhee, raakhee kaa tyauhaar har dhaage se jhaankataa, bhraat-bahan kaa pyaar bhraat-bahan kaa pyaar, baandh bahanaa khush hoteeresham kee yah dor, keematee sabase
रक्षा बंधन पर्व पर, बहना आई गाँव। हाथों में मेहँदी रची, और महावर पाँव। और महावर पाँव, चूड़ियों सजी कलाई। नैहर का लख नेह, भाग्य निज पर इतराई। बाँध रेशमी डोर, किया भाई का वंदन। बहना आई गाँव, मनाने रक्षा बंधन।आता सावन में सखी, राखी का त्यौहार। हर धागे से झाँकता, भ्रात-बहन का प्यार। भ्रात-बहन का प्यार, बाँध बहना खुश होतीरेशम की यह डोर, कीमती सबसे