कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ७ / ६३ № 7 of 63 रचना ७ / ६३
२९ सितम्बर २०१२ 29 September 2012 २९ सितम्बर २०१२

मूल जगत का बेटियाँ mool jagat kaa betiyaan मूल जगत का बेटियाँ

मूल जगत का बेटियाँ, जगती पर उपकार।

सिर्फ भयावह कल्पना, बेटी बिन संसार।

बेटी बिन संसार, बात सच्ची यह मानें

अगर किया ना गौर, अंत दुनिया का

जानें।

कहनी इतनी बात, करें स्वागत आगत का

जीवन का आधार

बेटियाँ, मूल जगत का।

-------------------------------------------

माँ मेरी, तुझसे करे, बेटी एक सवाल,

मुझे मारने गर्भ में, बिछा रही क्यों जाल?

बिछा रही क्यों जाल, ज़रा समझा दे मुझको

mool jagat kaa betiyaan, jagatee par upakaar

sirph bhayaawah kalpanaa, betee bin sansaar

·

betee bin sansaar, baat sachchee yah maanen

·

agar kiyaa naa gaur, ant duniyaa kaa

jaanen

·

kahanee itanee baat, karen svaagat aagat kaa

·

jeewan kaa aadhaar

betiyaan, mool jagat kaa

·

-------------------------------------------

·

maan meree, tujhase kare, betee ek sawaal,

·

mujhe maarane garbh men, bichaa rahee kyon jaal?

·

bichaa rahee kyon jaal, zaraa samajhaa de mujhako

मूल जगत का बेटियाँ, जगती पर उपकार।

सिर्फ भयावह कल्पना, बेटी बिन संसार।

बेटी बिन संसार, बात सच्ची यह मानें

अगर किया ना गौर, अंत दुनिया का

जानें।

कहनी इतनी बात, करें स्वागत आगत का

जीवन का आधार

बेटियाँ, मूल जगत का।

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माँ मेरी, तुझसे करे, बेटी एक सवाल,

मुझे मारने गर्भ में, बिछा रही क्यों जाल?

बिछा रही क्यों जाल, ज़रा समझा दे मुझको

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗