कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४८ / ६३ № 48 of 63 रचना ४८ / ६३
२५ अगस्त २०१६ 25 August 2016 २५ अगस्त २०१६

मेरा देश महान meraa desh mahaan मेरा देश महान

“धरा बचाओ”आजकल, छिड़ा खूब

अभियान।

॥

पौधे

रोपे जा रहे, गली, सड़क, मैदान।

॥

गली, सड़क, मैदान, जोश लेकिन दो दिन का।

॥

जब

तक बने न पेड़, कीजिये पोषण

उनका।

॥

कहे

कल्पना मित्र, जागरण ज्योत

जगाओ

॥

होगा

तब अभियान, सफलतम “धरा बचाओ”

॥

पावन

धरती देश की, कल तक थी

बेपीर।

॥

कदम

कदम थीं रोटियाँ, पग पग पर था नीर।

॥

पग

पग पर था नीर, क्षीर पूरित थीं नदियाँ

॥

हरे भरे थे खेत, रही हैं

साक्षी सदियाँ।

॥

सोचें

इतनी

“dharaa bachaao”aajakal, chidaa khoob

abhiyaan

·

paudhe

rope jaa rahe, galee, sadak, maidaan

·

galee, sadak, maidaan, josh lekin do din kaa

·

jab

tak bane n ped, keejiye poshan

unakaa

·

kahe

kalpanaa mitr, jaagaran jyot

jagaao

·

hogaa

tab abhiyaan, saphalatam “dharaa bachaao”

·

paawan

dharatee desh kee, kal tak thee

bepeer

·

kadam

kadam theen rotiyaan, pag pag par thaa neer

·

pag

pag par thaa neer, ksheer poorit theen nadiyaan

·

hare bhare the khet, rahee hain

saakshee sadiyaan

·

sochen

itanee

“धरा बचाओ”आजकल, छिड़ा खूब

अभियान।

॥

पौधे

रोपे जा रहे, गली, सड़क, मैदान।

॥

गली, सड़क, मैदान, जोश लेकिन दो दिन का।

॥

जब

तक बने न पेड़, कीजिये पोषण

उनका।

॥

कहे

कल्पना मित्र, जागरण ज्योत

जगाओ

॥

होगा

तब अभियान, सफलतम “धरा बचाओ”

॥

पावन

धरती देश की, कल तक थी

बेपीर।

॥

कदम

कदम थीं रोटियाँ, पग पग पर था नीर।

॥

पग

पग पर था नीर, क्षीर पूरित थीं नदियाँ

॥

हरे भरे थे खेत, रही हैं

साक्षी सदियाँ।

॥

सोचें

इतनी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗