कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ६ / ६३ № 6 of 63 रचना ६ / ६३
२२ सितम्बर २०१२ 22 September 2012 २२ सितम्बर २०१२

गणपति पूजन पर्व से ganapati poojan parv se गणपति पूजन पर्व से

गणपति पूजन पर्व से, फैला जग में ओज।

॥

घर

घर होती आरती, गायन वादन रोज।

॥

गायन

वादन रोज, सकल

जन हँसते गाते

॥

लड्डू, मोदक, भोग, लगा सब मिलकर

खाते।

॥

दीपक, अगर, सुगंध, श्लोक, मंत्रों का

गुंजन

॥

मन

को करता मुग्ध, भावमय गणपति पूजन।

॥

परम्पराएँ

देश की, नैतिकता

का मूल।

॥

भोली

जनता प्रेम से, करती सहज

कबूल।

॥

करती

सहज कबूल, श्रंखला

जोड़ कर्म की

॥

तन

की पीड़ा भूल, जगाती ज्योत धर्म की।

॥

कहनी

इतनी

ganapati poojan parv se, phailaa jag men oj

·

ghar

ghar hotee aaratee, gaayan waadan roj

·

gaayan

waadan roj, sakal

jan hansate gaate

·

laddoo, modak, bhog, lagaa sab milakar

khaate

·

deepak, agar, sugandh, shlok, mantron kaa

gunjan

·

man

ko karataa mugdh, bhaawamay ganapati poojan

·

paramparaaen

desh kee, naitikataa

kaa mool

·

bholee

janataa prem se, karatee sahaj

kabool

·

karatee

sahaj kabool, shrankhalaa

jod karm kee

·

tan

kee peedaa bhool, jagaatee jyot dharm kee

·

kahanee

itanee

गणपति पूजन पर्व से, फैला जग में ओज।

॥

घर

घर होती आरती, गायन वादन रोज।

॥

गायन

वादन रोज, सकल

जन हँसते गाते

॥

लड्डू, मोदक, भोग, लगा सब मिलकर

खाते।

॥

दीपक, अगर, सुगंध, श्लोक, मंत्रों का

गुंजन

॥

मन

को करता मुग्ध, भावमय गणपति पूजन।

॥

परम्पराएँ

देश की, नैतिकता

का मूल।

॥

भोली

जनता प्रेम से, करती सहज

कबूल।

॥

करती

सहज कबूल, श्रंखला

जोड़ कर्म की

॥

तन

की पीड़ा भूल, जगाती ज्योत धर्म की।

॥

कहनी

इतनी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗