कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १० / ६७ № 10 of 67 रचना १० / ६७
२ अक्तूबर २०१२ 2 October 2012 २ अक्तूबर २०१२

सोच रहे थे पेड़ soch rahe the ped सोच रहे थे पेड़

सड़क किनारे के सभी, सोच रहे थे पेड़

मानव से चलकर कहें, अब मत हमको छेड़।

॥

फल छाया देंगे नहीं, नहीं सहेंगे दाब

॥

सींचो पहले प्रेम से, पाओ सुफल जनाब।

॥

हमने छाया दी तुम्हें, कैसा ये अंधेर

॥

तुमने हमको काटकर, किया काष्ठ का ढेर।

॥

बेच बेच फल फूल से, फैलाया व्यापार

॥

करते रहे निरीह पर, फिर भी अत्याचार।

॥

धिक्कृत तेरा स्वार्थ है, धिक्कृत मायामोह

॥

हम भी तुमसे कम

sadak kinaare ke sabhee, soch rahe the ped

maanaw se chalakar kahen, ab mat hamako ched

·

phal chaayaa denge naheen, naheen sahenge daab

·

seencho pahale prem se, paao suphal janaab

·

hamane chaayaa dee tumhen, kaisaa ye andher

·

tumane hamako kaatakar, kiyaa kaashth kaa dher

·

bech bech phal phool se, phailaayaa wyaapaar

·

karate rahe nireeh par, phir bhee atyaachaar

·

dhikkriit teraa svaarth hai, dhikkriit maayaamoh

·

ham bhee tumase kam

सड़क किनारे के सभी, सोच रहे थे पेड़

मानव से चलकर कहें, अब मत हमको छेड़।

॥

फल छाया देंगे नहीं, नहीं सहेंगे दाब

॥

सींचो पहले प्रेम से, पाओ सुफल जनाब।

॥

हमने छाया दी तुम्हें, कैसा ये अंधेर

॥

तुमने हमको काटकर, किया काष्ठ का ढेर।

॥

बेच बेच फल फूल से, फैलाया व्यापार

॥

करते रहे निरीह पर, फिर भी अत्याचार।

॥

धिक्कृत तेरा स्वार्थ है, धिक्कृत मायामोह

॥

हम भी तुमसे कम

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗