कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ९ / ६५ № 9 of 65 रचना ९ / ६५
२ अक्तूबर २०१२ 2 October 2012 २ अक्तूबर २०१२

सोच रहे थे पेड़ soch rahe the ped सोच रहे थे पेड़

सड़क किनारे के सभी, सोच रहे थे पेड़

मानव से चलकर कहें, अब मत हमको छेड़।

फल छाया देंगे नहीं, नहीं सहेंगे दाब

सींचो पहले प्रेम से, पाओ सुफल जनाब।

हमने छाया दी तुम्हें, कैसा ये अंधेर

तुमने हमको काटकर, किया काष्ठ का ढेर।

बेच बेच फल फूल से, फैलाया व्यापार

करते रहे निरीह पर, फिर भी अत्याचार।

धिक्कृत तेरा स्वार्थ है, धिक्कृत मायामोह

हम भी तुमसे कम

sadak kinaare ke sabhee, soch rahe the ped

maanaw se chalakar kahen, ab mat hamako ched

·

phal chaayaa denge naheen, naheen sahenge daab

·

seencho pahale prem se, paao suphal janaab

·

hamane chaayaa dee tumhen, kaisaa ye andher

·

tumane hamako kaatakar, kiyaa kaashth kaa dher

·

bech bech phal phool se, phailaayaa wyaapaar

·

karate rahe nireeh par, phir bhee atyaachaar

·

dhikkriit teraa svaarth hai, dhikkriit maayaamoh

·

ham bhee tumase kam

सड़क किनारे के सभी, सोच रहे थे पेड़

मानव से चलकर कहें, अब मत हमको छेड़।

फल छाया देंगे नहीं, नहीं सहेंगे दाब

सींचो पहले प्रेम से, पाओ सुफल जनाब।

हमने छाया दी तुम्हें, कैसा ये अंधेर

तुमने हमको काटकर, किया काष्ठ का ढेर।

बेच बेच फल फूल से, फैलाया व्यापार

करते रहे निरीह पर, फिर भी अत्याचार।

धिक्कृत तेरा स्वार्थ है, धिक्कृत मायामोह

हम भी तुमसे कम

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗