कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १० / ६५ № 10 of 65 रचना १० / ६५
१९ अक्तूबर २०१२ 19 October 2012 १९ अक्तूबर २०१२

माँ तुम जीवन ज्योत्सना maan tum jeewan jyotsanaa माँ तुम जीवन ज्योत्सना

माँ तुम जीवन ज्योत्सना, तुम जन्मों का सार।

प्रातः का तुम मंत्र हो, तुम्हें नमन शत बार।

त्याग तुम्हारा जग विदित, ममता

प्रेम अगाध।

हृदय हिलोरें मारती, संतति सुख की

साध।

किया बाल-हठ कृष्ण ने, माँ तुम

कितनी धीर।

पुत्र प्रेम हित युक्ति से, चाँद

उतारा नीर।

माँ तुम केवल दायिनी, लेने की कब

चाह।

सुख वारे संतान पर, दुख की चुन

ली राह।

maan tum jeewan jyotsanaa, tum janmon kaa saar

praatah kaa tum mantr ho, tumhen naman shat baar

·

tyaag tumhaaraa jag widit, mamataa

prem agaadh

·

hriiday hiloren maaratee, santati sukh kee

saadh

·

kiyaa baal-hath kriishn ne, maan tum

kitanee dheer

·

putr prem hit yukti se, chaand

utaaraa neer

·

maan tum kewal daayinee, lene kee kab

chaah

·

sukh waare santaan par, dukh kee chun

lee raah

माँ तुम जीवन ज्योत्सना, तुम जन्मों का सार।

प्रातः का तुम मंत्र हो, तुम्हें नमन शत बार।

त्याग तुम्हारा जग विदित, ममता

प्रेम अगाध।

हृदय हिलोरें मारती, संतति सुख की

साध।

किया बाल-हठ कृष्ण ने, माँ तुम

कितनी धीर।

पुत्र प्रेम हित युक्ति से, चाँद

उतारा नीर।

माँ तुम केवल दायिनी, लेने की कब

चाह।

सुख वारे संतान पर, दुख की चुन

ली राह।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗