कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १२ / ६७ № 12 of 67 रचना १२ / ६७
२२ अक्तूबर २०१२ 22 October 2012 २२ अक्तूबर २०१२

बंजारा मन बढ़ चला... banjaaraa man bढ़ chalaa बंजारा मन बढ़ चला...

छंद रचे दोहे रचे, रचे अनगिनत गीत।

॥

मगर हुए सब हाशिये, मन भाया नवगीत।

॥

अंचल-अंचल से घुली, मोहक मधुर सुंगंध।

॥

बोलों में नवगीत के, बसी गाँव की गंध।

॥

भोलापन औ सरलता, सुख दुख की तस्वीर।

॥

नवगीतों से झाँकती, ग्राम्य जनों

की पीर।

॥

नवगीतों की तान में, बसे करुण उद्गार।

॥

झंकृत करते हृदय को, ज्यों वीणा के

तार।

॥

घुलता जब नवगीत में, प्रेम रसों

chand rache dohe rache, rache anaginat geet

·

magar hue sab haashiye, man bhaayaa nawageet

·

anchal-anchal se ghulee, mohak madhur sungandh

·

bolon men nawageet ke, basee gaanv kee gandh

·

bholaapan au saralataa, sukh dukh kee tasveer

·

nawageeton se jhaankatee, graamy janon

kee peer

·

nawageeton kee taan men, base karun udgaar

·

jhankriit karate hriiday ko, jyon weenaa ke

taar

·

ghulataa jab nawageet men, prem rason

छंद रचे दोहे रचे, रचे अनगिनत गीत।

॥

मगर हुए सब हाशिये, मन भाया नवगीत।

॥

अंचल-अंचल से घुली, मोहक मधुर सुंगंध।

॥

बोलों में नवगीत के, बसी गाँव की गंध।

॥

भोलापन औ सरलता, सुख दुख की तस्वीर।

॥

नवगीतों से झाँकती, ग्राम्य जनों

की पीर।

॥

नवगीतों की तान में, बसे करुण उद्गार।

॥

झंकृत करते हृदय को, ज्यों वीणा के

तार।

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घुलता जब नवगीत में, प्रेम रसों

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗