कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ५५ / ६३ № 55 of 63 रचना ५५ / ६३
१० नवम्बर २०१९ 10 November 2019 १० नवम्बर २०१९

माँ बिन अपना कौन है maan bin apanaa kaun hai माँ बिन अपना कौन है

माँ बिन अपना कौन है

माँ बच्चों की जान।

जन्म नहीं केवल दिया

किए सकल सुख दान।

किए सकल सुख दान

कहाई जीवनधारा

दुनिया का हर दोष

सिर्फ ममता से हारा।

माँ को करें प्रणाम

सफलता पाएँ हर दिन

ममता की यह खान

न कोई अपना माँ बिन।

माँ जैसा कोई नहीं

देख लिया संसार।

किश्ती थी मँझधार में

हमें उतारा पार।

हमें उतारा पार

सुख नहीं अपना देखा

हर बाधा को बाँध

बना दी लक्ष्मण रेखा।

कहनी इतनी बात

लाख हो रुपया पैसा

देख लिया संसार

नहीं कोई माँ जैसा।

माँ तेरी संतान क्यों

भूली तेरा प्यार।

लालच उसको ले गई

सात समंदर पार।

सात समंदर पार

तुझे एकाकी छोड़ा

जोड़े अपने तार

और दिल तेरा तोड़ा

कहना इतना, अंश

हुआ क्यों अपना बैरी

भूल गई क्यों प्यार

आज संतति माँ तेरी।

maan bin apanaa kaun hai

maan bachchon kee jaan

janm naheen kewal diyaa

kie sakal sukh daan

kie sakal sukh daan

kahaaee jeewanadhaaraa

duniyaa kaa har dosh

sirph mamataa se haaraa

maan ko karen pranaam

saphalataa paaen har din

mamataa kee yah khaan

n koee apanaa maan bin

·

maan jaisaa koee naheen

dekh liyaa sansaar

kishtee thee manjhadhaar men

hamen utaaraa paar

hamen utaaraa paar

sukh naheen apanaa dekhaa

har baadhaa ko baandh

banaa dee lakshman rekhaa

kahanee itanee baat

laakh ho rupayaa paisaa

dekh liyaa sansaar

naheen koee maan jaisaa

·

maan teree santaan kyon

bhoolee teraa pyaar

laalach usako le gaee

saat samandar paar

saat samandar paar

tujhe ekaakee chodaa

jode apane taar

aur dil teraa todaa

kahanaa itanaa, ansh

huaa kyon apanaa bairee

bhool gaee kyon pyaar

aaj santati maan teree

माँ बिन अपना कौन है

माँ बच्चों की जान।

जन्म नहीं केवल दिया

किए सकल सुख दान।

किए सकल सुख दान

कहाई जीवनधारा

दुनिया का हर दोष

सिर्फ ममता से हारा।

माँ को करें प्रणाम

सफलता पाएँ हर दिन

ममता की यह खान

न कोई अपना माँ बिन।

माँ जैसा कोई नहीं

देख लिया संसार।

किश्ती थी मँझधार में

हमें उतारा पार।

हमें उतारा पार

सुख नहीं अपना देखा

हर बाधा को बाँध

बना दी लक्ष्मण रेखा।

कहनी इतनी बात

लाख हो रुपया पैसा

देख लिया संसार

नहीं कोई माँ जैसा।

माँ तेरी संतान क्यों

भूली तेरा प्यार।

लालच उसको ले गई

सात समंदर पार।

सात समंदर पार

तुझे एकाकी छोड़ा

जोड़े अपने तार

और दिल तेरा तोड़ा

कहना इतना, अंश

हुआ क्यों अपना बैरी

भूल गई क्यों प्यार

आज संतति माँ तेरी।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗