माँ बिन अपना कौन है maan bin apanaa kaun hai माँ बिन अपना कौन है
माँ बिन अपना कौन है
माँ बच्चों की जान।
जन्म नहीं केवल दिया
किए सकल सुख दान।
किए सकल सुख दान
कहाई जीवनधारा
दुनिया का हर दोष
सिर्फ ममता से हारा।
माँ को करें प्रणाम
सफलता पाएँ हर दिन
ममता की यह खान
न कोई अपना माँ बिन।
माँ जैसा कोई नहीं
देख लिया संसार।
किश्ती थी मँझधार में
हमें उतारा पार।
हमें उतारा पार
सुख नहीं अपना देखा
हर बाधा को बाँध
बना दी लक्ष्मण रेखा।
कहनी इतनी बात
लाख हो रुपया पैसा
देख लिया संसार
नहीं कोई माँ जैसा।
माँ तेरी संतान क्यों
भूली तेरा प्यार।
लालच उसको ले गई
सात समंदर पार।
सात समंदर पार
तुझे एकाकी छोड़ा
जोड़े अपने तार
और दिल तेरा तोड़ा
कहना इतना, अंश
हुआ क्यों अपना बैरी
भूल गई क्यों प्यार
आज संतति माँ तेरी।
maan bin apanaa kaun hai
maan bachchon kee jaan
janm naheen kewal diyaa
kie sakal sukh daan
kie sakal sukh daan
kahaaee jeewanadhaaraa
duniyaa kaa har dosh
sirph mamataa se haaraa
maan ko karen pranaam
saphalataa paaen har din
mamataa kee yah khaan
n koee apanaa maan bin
maan jaisaa koee naheen
dekh liyaa sansaar
kishtee thee manjhadhaar men
hamen utaaraa paar
hamen utaaraa paar
sukh naheen apanaa dekhaa
har baadhaa ko baandh
banaa dee lakshman rekhaa
kahanee itanee baat
laakh ho rupayaa paisaa
dekh liyaa sansaar
naheen koee maan jaisaa
maan teree santaan kyon
bhoolee teraa pyaar
laalach usako le gaee
saat samandar paar
saat samandar paar
tujhe ekaakee chodaa
jode apane taar
aur dil teraa todaa
kahanaa itanaa, ansh
huaa kyon apanaa bairee
bhool gaee kyon pyaar
aaj santati maan teree
माँ बिन अपना कौन है
माँ बच्चों की जान।
जन्म नहीं केवल दिया
किए सकल सुख दान।
किए सकल सुख दान
कहाई जीवनधारा
दुनिया का हर दोष
सिर्फ ममता से हारा।
माँ को करें प्रणाम
सफलता पाएँ हर दिन
ममता की यह खान
न कोई अपना माँ बिन।
माँ जैसा कोई नहीं
देख लिया संसार।
किश्ती थी मँझधार में
हमें उतारा पार।
हमें उतारा पार
सुख नहीं अपना देखा
हर बाधा को बाँध
बना दी लक्ष्मण रेखा।
कहनी इतनी बात
लाख हो रुपया पैसा
देख लिया संसार
नहीं कोई माँ जैसा।
माँ तेरी संतान क्यों
भूली तेरा प्यार।
लालच उसको ले गई
सात समंदर पार।
सात समंदर पार
तुझे एकाकी छोड़ा
जोड़े अपने तार
और दिल तेरा तोड़ा
कहना इतना, अंश
हुआ क्यों अपना बैरी
भूल गई क्यों प्यार
आज संतति माँ तेरी।