कह -मुकरियाँ 41 से 45 kah -mukariyaan 41 se 45 कह -मुकरियाँ 41 से 45
४१)
जहाँ रहूँ वो रहता याद।
मन-आँगन उससे आबाद।
वो मेरा सच्चा मनमीत
क्या सखि साजन?
ना सखि, गीत!
४२)
जब तब वो उपदेश सुनाए।
कर न सकूँ जो मन में आए।
शाश्वत प्रेम सिखा हिय जीता
क्या सखि साजन?
ना सखि, गीता!
४३)
चाहे देखूँ बरसों बाद।
नज़र पड़े सब आए याद।
कैसे भूलूँ वो है खास
क्या सखि प्रियतम?
ना, इतिहास!
४४)
आते जाते नज़र मिलाता।
स्वागत में बाहें फैलाता।
घर गुलशन का वो है राजा
क्या सखि साजन?
ना, दरवाजा!
४५)
जब नैया हिचकोले खाए।
बुज़दिल बढ़कर पास न आए।
हँसे दूर से, करे इशारा
क्या सखि, साजन?
नहीं, किनारा!
41)
jahaan rahoon wo rahataa yaad
man-aangan usase aabaad
wo meraa sachchaa manameet
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, geet!
42)
jab tab wo upadesh sunaae
kar n sakoon jo man men aae
shaashvat prem sikhaa hiy jeetaa
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, geetaa!
43)
chaahe dekhoon barason baad
nazar pade sab aae yaad
kaise bhooloon wo hai khaas
kyaa sakhi priyatam?
naa, itihaas!
44)
aate jaate nazar milaataa
svaagat men baahen phailaataa
ghar gulashan kaa wo hai raajaa
kyaa sakhi saajan?
naa, darawaajaa!
45)
jab naiyaa hichakole khaae
buzadil bढ़kar paas n aae
hanse door se, kare ishaaraa
kyaa sakhi, saajan?
naheen, kinaaraa!
४१)
जहाँ रहूँ वो रहता याद।
मन-आँगन उससे आबाद।
वो मेरा सच्चा मनमीत
क्या सखि साजन?
ना सखि, गीत!
४२)
जब तब वो उपदेश सुनाए।
कर न सकूँ जो मन में आए।
शाश्वत प्रेम सिखा हिय जीता
क्या सखि साजन?
ना सखि, गीता!
४३)
चाहे देखूँ बरसों बाद।
नज़र पड़े सब आए याद।
कैसे भूलूँ वो है खास
क्या सखि प्रियतम?
ना, इतिहास!
४४)
आते जाते नज़र मिलाता।
स्वागत में बाहें फैलाता।
घर गुलशन का वो है राजा
क्या सखि साजन?
ना, दरवाजा!
४५)
जब नैया हिचकोले खाए।
बुज़दिल बढ़कर पास न आए।
हँसे दूर से, करे इशारा
क्या सखि, साजन?
नहीं, किनारा!