कह-मुकरियाँ ६ से १० kah-mukariyaan 6 se 10 कह-मुकरियाँ ६ से १०
६)
रातों को वो मिलने आता।
नित्य नया इक रूप दिखाता।
लाज न आए, कैसा बंदा?
क्या सखि साजन?
ना सखि, चंदा!
७)
आते जाते मुझे निहारे।
पल-पल मेरा रूप सँवारे।
भला लगे उजला उसका तन।
क्या सखि साजन?
ना सखि दर्पन!
८)
साथ चले जब सीना ताने।
बात न वो फिर मेरी माने।
हाथ छुड़ाकर भागा जाता।
क्या सखि साजन?
ना सखि, छाता!
९)
सुबह सबेरे टेर लगाए।
जब तब कर्कश बोल सुनाए।
पाहुन को दे रोज़ बुलौवा।
क्या सखि, साजन?
ना सखि, कौवा!
१०)
उसका काला रंग न भाए।
गुण भी कोई नज़र न आए।
फिर भी लट्टू है उसपे मन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, बैंगन!
6)
raaton ko wo milane aataa
nity nayaa ik roop dikhaataa
laaj n aae, kaisaa bandaa?
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, chandaa!
7)
aate jaate mujhe nihaare
pal-pal meraa roop sanvaare
bhalaa lage ujalaa usakaa tan
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi darpan!
8)
saath chale jab seenaa taane
baat n wo phir meree maane
haath chudaakar bhaagaa jaataa
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, chaataa!
9)
subah sabere ter lagaae
jab tab karkash bol sunaae
paahun ko de roz bulauwaa
kyaa sakhi, saajan?
naa sakhi, kauwaa!
10)
usakaa kaalaa rang n bhaae
gun bhee koee nazar n aae
phir bhee lattoo hai usape man
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, baingan!
६)
रातों को वो मिलने आता।
नित्य नया इक रूप दिखाता।
लाज न आए, कैसा बंदा?
क्या सखि साजन?
ना सखि, चंदा!
७)
आते जाते मुझे निहारे।
पल-पल मेरा रूप सँवारे।
भला लगे उजला उसका तन।
क्या सखि साजन?
ना सखि दर्पन!
८)
साथ चले जब सीना ताने।
बात न वो फिर मेरी माने।
हाथ छुड़ाकर भागा जाता।
क्या सखि साजन?
ना सखि, छाता!
९)
सुबह सबेरे टेर लगाए।
जब तब कर्कश बोल सुनाए।
पाहुन को दे रोज़ बुलौवा।
क्या सखि, साजन?
ना सखि, कौवा!
१०)
उसका काला रंग न भाए।
गुण भी कोई नज़र न आए।
फिर भी लट्टू है उसपे मन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, बैंगन!