उतरी गंगा स्वर्ग से utaree gangaa svarg se उतरी गंगा स्वर्ग से
उतरी
गंगा स्वर्ग से, लिए वेगमय धार।
घनी
जटाओं बीच में, शिव ने झेला भार।
शिव
ने झेला भार, उसे माथे बैठाया
मृत्युलोक
में भेज, धरा
को स्वर्ग बनाया।
अमृत
जल का घूँट, करे हर रोगी चंगा
लिए
वेगमय धार, स्वर्ग से उतरी गंगा।
तुमसे
मोक्ष मिला हमें, तुम ही तारनहार।
गंगा
माँ तुमने किए, जन-जन पर उपकार।
जन-जन
पर उपकार, धरा
को स्वर्ग बनाया
किया
जहाँ विश्राम, नगर वो धाम कहाया।
दिये
स्वस्थ
utaree
gangaa svarg se, lie wegamay dhaar
ghanee
jataaon beech men, shiw ne jhelaa bhaar
shiw
ne jhelaa bhaar, use maathe baithaayaa
mriityulok
men bhej, dharaa
ko svarg banaayaa
amriit
jal kaa ghoont, kare har rogee changaa
lie
wegamay dhaar, svarg se utaree gangaa
tumase
moksh milaa hamen, tum hee taaranahaar
gangaa
maan tumane kie, jan-jan par upakaar
jan-jan
par upakaar, dharaa
ko svarg banaayaa
kiyaa
jahaan wishraam, nagar wo dhaam kahaayaa
diye
svasth
उतरी
गंगा स्वर्ग से, लिए वेगमय धार।
घनी
जटाओं बीच में, शिव ने झेला भार।
शिव
ने झेला भार, उसे माथे बैठाया
मृत्युलोक
में भेज, धरा
को स्वर्ग बनाया।
अमृत
जल का घूँट, करे हर रोगी चंगा
लिए
वेगमय धार, स्वर्ग से उतरी गंगा।
तुमसे
मोक्ष मिला हमें, तुम ही तारनहार।
गंगा
माँ तुमने किए, जन-जन पर उपकार।
जन-जन
पर उपकार, धरा
को स्वर्ग बनाया
किया
जहाँ विश्राम, नगर वो धाम कहाया।
दिये
स्वस्थ