कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४५ / ६३ № 45 of 63 रचना ४५ / ६३
१७ मार्च २०१६ 17 March 2016 १७ मार्च २०१६

उतरी गंगा स्वर्ग से utaree gangaa svarg se उतरी गंगा स्वर्ग से

उतरी

गंगा स्वर्ग से, लिए वेगमय धार।

॥

घनी

जटाओं बीच में, शिव ने झेला भार।

॥

शिव

ने झेला भार, उसे माथे बैठाया

॥

मृत्युलोक

में भेज, धरा

को स्वर्ग बनाया।

॥

अमृत

जल का घूँट, करे हर रोगी चंगा

॥

लिए

वेगमय धार, स्वर्ग से उतरी गंगा।

॥

तुमसे

मोक्ष मिला हमें, तुम ही तारनहार।

॥

गंगा

माँ तुमने किए, जन-जन पर उपकार।

॥

जन-जन

पर उपकार, धरा

को स्वर्ग बनाया

॥

किया

जहाँ विश्राम, नगर वो धाम कहाया।

॥

दिये

स्वस्थ

utaree

gangaa svarg se, lie wegamay dhaar

·

ghanee

jataaon beech men, shiw ne jhelaa bhaar

·

shiw

ne jhelaa bhaar, use maathe baithaayaa

·

mriityulok

men bhej, dharaa

ko svarg banaayaa

·

amriit

jal kaa ghoont, kare har rogee changaa

·

lie

wegamay dhaar, svarg se utaree gangaa

·

tumase

moksh milaa hamen, tum hee taaranahaar

·

gangaa

maan tumane kie, jan-jan par upakaar

·

jan-jan

par upakaar, dharaa

ko svarg banaayaa

·

kiyaa

jahaan wishraam, nagar wo dhaam kahaayaa

·

diye

svasth

उतरी

गंगा स्वर्ग से, लिए वेगमय धार।

॥

घनी

जटाओं बीच में, शिव ने झेला भार।

॥

शिव

ने झेला भार, उसे माथे बैठाया

॥

मृत्युलोक

में भेज, धरा

को स्वर्ग बनाया।

॥

अमृत

जल का घूँट, करे हर रोगी चंगा

॥

लिए

वेगमय धार, स्वर्ग से उतरी गंगा।

॥

तुमसे

मोक्ष मिला हमें, तुम ही तारनहार।

॥

गंगा

माँ तुमने किए, जन-जन पर उपकार।

॥

जन-जन

पर उपकार, धरा

को स्वर्ग बनाया

॥

किया

जहाँ विश्राम, नगर वो धाम कहाया।

॥

दिये

स्वस्थ

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗