कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११७ / २०५ № 117 of 205 रचना ११७ / २०५
१९ मार्च २०१६ 19 March 2016 १९ मार्च २०१६

गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है gulaabee-gulaabee huaa aasamaan hai गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है

उमंगों

ने बाँधा कुछ ऐसा समाँ है

॥

कि

रंगों में डूबा ये सारा जहाँ है

॥

जले

होलिका में कपट क्लेश सारे

॥

महज

मित्रता का ही आलम यहाँ है

॥

हुई

एकजुट है,

अमीरी

गरीबी

॥

नहीं

फर्क का कोई नामोनिशाँ हैं

॥

गले

प्यार से मिल रहे राम-रहमत

॥

न

अब दूरी उनके दिलों-दरमियाँ है

॥

सँवरकर

रँगीले पलाशों का वन से

॥

शहर

को चला झूमता कारवाँ है

॥

उमर

से शिकायत भी होगी तो होगी

॥

मगर

आज के दिन तो हर दिल जवाँ है

॥

गली

गाँव में गेर,

के

हैं नज़ारे

॥

तो

शहरों को होली-मिलन पर गुमाँ है

॥

यों

फागुन ने हर मन के दागों को धोया

॥

गुलाबी-गुलाबी, ज़मीं-आसमाँ

है

॥

विदेशों

में भी ‘कल्पना’ खेल होली

॥

प्रवासी

समझते कि भारत यहाँ है

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

umangon

ne baandhaa kuch aisaa samaan hai

·

ki

rangon men doobaa ye saaraa jahaan hai

·

jale

holikaa men kapat klesh saare

·

mahaj

mitrataa kaa hee aalam yahaan hai

·

huee

ekajut hai,

ameeree

gareebee

·

naheen

phark kaa koee naamonishaan hain

·

gale

pyaar se mil rahe raam-rahamat

·

n

ab dooree unake dilon-daramiyaan hai

·

sanvarakar

rangeele palaashon kaa wan se

·

shahar

ko chalaa jhoomataa kaarawaan hai

·

umar

se shikaayat bhee hogee to hogee

·

magar

aaj ke din to har dil jawaan hai

·

galee

gaanv men ger,

ke

hain nazaare

·

to

shaharon ko holee-milan par gumaan hai

·

yon

phaagun ne har man ke daagon ko dhoyaa

·

gulaabee-gulaabee, zameen-aasamaan

hai

·

wideshon

men bhee ‘kalpanaa’ khel holee

·

prawaasee

samajhate ki bhaarat yahaan hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

उमंगों

ने बाँधा कुछ ऐसा समाँ है

॥

कि

रंगों में डूबा ये सारा जहाँ है

॥

जले

होलिका में कपट क्लेश सारे

॥

महज

मित्रता का ही आलम यहाँ है

॥

हुई

एकजुट है,

अमीरी

गरीबी

॥

नहीं

फर्क का कोई नामोनिशाँ हैं

॥

गले

प्यार से मिल रहे राम-रहमत

॥

न

अब दूरी उनके दिलों-दरमियाँ है

॥

सँवरकर

रँगीले पलाशों का वन से

॥

शहर

को चला झूमता कारवाँ है

॥

उमर

से शिकायत भी होगी तो होगी

॥

मगर

आज के दिन तो हर दिल जवाँ है

॥

गली

गाँव में गेर,

के

हैं नज़ारे

॥

तो

शहरों को होली-मिलन पर गुमाँ है

॥

यों

फागुन ने हर मन के दागों को धोया

॥

गुलाबी-गुलाबी, ज़मीं-आसमाँ

है

॥

विदेशों

में भी ‘कल्पना’ खेल होली

॥

प्रवासी

समझते कि भारत यहाँ है

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗