कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११६ / २०४ № 116 of 204 रचना ११६ / २०४
१९ मार्च २०१६ 19 March 2016 १९ मार्च २०१६

गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है gulaabee-gulaabee huaa aasamaan hai गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है

उमंगों

ने बाँधा कुछ ऐसा समाँ है

कि

रंगों में डूबा ये सारा जहाँ है

जले

होलिका में कपट क्लेश सारे

महज

मित्रता का ही आलम यहाँ है

हुई

एकजुट है,

अमीरी

गरीबी

नहीं

फर्क का कोई नामोनिशाँ हैं

गले

प्यार से मिल रहे राम-रहमत

अब दूरी उनके दिलों-दरमियाँ है

सँवरकर

रँगीले पलाशों का वन से

शहर

को चला झूमता कारवाँ है

उमर

से शिकायत भी होगी तो होगी

मगर

आज के दिन तो हर दिल जवाँ है

गली

गाँव में गेर,

के

हैं नज़ारे

तो

शहरों को होली-मिलन पर गुमाँ है

यों

फागुन ने हर मन के दागों को धोया

गुलाबी-गुलाबी, ज़मीं-आसमाँ

है

विदेशों

में भी ‘कल्पना’ खेल होली

प्रवासी

समझते कि भारत यहाँ है

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

umangon

ne baandhaa kuch aisaa samaan hai

·

ki

rangon men doobaa ye saaraa jahaan hai

·

jale

holikaa men kapat klesh saare

·

mahaj

mitrataa kaa hee aalam yahaan hai

·

huee

ekajut hai,

ameeree

gareebee

·

naheen

phark kaa koee naamonishaan hain

·

gale

pyaar se mil rahe raam-rahamat

·

n

ab dooree unake dilon-daramiyaan hai

·

sanvarakar

rangeele palaashon kaa wan se

·

shahar

ko chalaa jhoomataa kaarawaan hai

·

umar

se shikaayat bhee hogee to hogee

·

magar

aaj ke din to har dil jawaan hai

·

galee

gaanv men ger,

ke

hain nazaare

·

to

shaharon ko holee-milan par gumaan hai

·

yon

phaagun ne har man ke daagon ko dhoyaa

·

gulaabee-gulaabee, zameen-aasamaan

hai

·

wideshon

men bhee ‘kalpanaa’ khel holee

·

prawaasee

samajhate ki bhaarat yahaan hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

उमंगों

ने बाँधा कुछ ऐसा समाँ है

कि

रंगों में डूबा ये सारा जहाँ है

जले

होलिका में कपट क्लेश सारे

महज

मित्रता का ही आलम यहाँ है

हुई

एकजुट है,

अमीरी

गरीबी

नहीं

फर्क का कोई नामोनिशाँ हैं

गले

प्यार से मिल रहे राम-रहमत

अब दूरी उनके दिलों-दरमियाँ है

सँवरकर

रँगीले पलाशों का वन से

शहर

को चला झूमता कारवाँ है

उमर

से शिकायत भी होगी तो होगी

मगर

आज के दिन तो हर दिल जवाँ है

गली

गाँव में गेर,

के

हैं नज़ारे

तो

शहरों को होली-मिलन पर गुमाँ है

यों

फागुन ने हर मन के दागों को धोया

गुलाबी-गुलाबी, ज़मीं-आसमाँ

है

विदेशों

में भी ‘कल्पना’ खेल होली

प्रवासी

समझते कि भारत यहाँ है

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗