कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५ / २०५ № 5 of 205 रचना ५ / २०५
८ जुलाई २०१३ 8 July 2013 ८ जुलाई २०१३

भू को चली भागीरथी bhoo ko chalee bhaageerathee भू को चली भागीरथी

स्वर्ग के सुख त्यागकर, भू को चली भागीरथी

पर्वतों की गोद से, होकर बही भागीरथी

॥

कैद कर अपनी जटा में, शिव ने रोका था उसे

फिर बढ़ी गोमुख से हँसती, वेग सी भागीरथी

॥

धाम कहलाए सभी जो, राह में आए शहर

रुक गई हरिद्वार में, द्रुतगामिनी भागीरथी

॥

पाप धोए सर्व जन के, कष्ट भी सबके हरे

और पूजित भी हुई, वरदायिनी भागीरथी

॥

अब युगों की यह धरोहर, खो रही पहचान है

भव्य भव की भीड़ में, बेदम हुई भागीरथी

॥

घाट टूटे, पाट रूठे, जल प्रदूषित हो चला

कह रही है दास्ताँ, दुख से भरी भागीरथी

॥

देवताओं की दुलारी, दंग है निज अपने हश्र से

मिट रहा अस्तित्व अब तो, घुट रही भागीरथी

॥

कौन है? संजीवनी लाए, उसे नव प्राण दे

अमृता मृत हो चली, नाज़ों पली भागीरथी

॥

जाग रे इंसान, कुछ ऐसे भगीरथ यत्न कर

खिलखिलाए ज्यों पुनः, रोती हुई भागीरथी

॥

*अनुभूति में प्रकाशित*

॥

---कल्पना रामानी

१७ जून २०१३

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

svarg ke sukh tyaagakar, bhoo ko chalee bhaageerathee

parvaton kee god se, hokar bahee bhaageerathee

·

kaid kar apanee jataa men, shiw ne rokaa thaa use

phir bढ़ee gomukh se hansatee, weg see bhaageerathee

·

dhaam kahalaae sabhee jo, raah men aae shahar

ruk gaee haridvaar men, drutagaaminee bhaageerathee

·

paap dhoe sarv jan ke, kasht bhee sabake hare

aur poojit bhee huee, waradaayinee bhaageerathee

·

ab yugon kee yah dharohar, kho rahee pahachaan hai

bhavy bhaw kee bheed men, bedam huee bhaageerathee

·

ghaat toote, paat roothe, jal pradooshit ho chalaa

kah rahee hai daastaan, dukh se bharee bhaageerathee

·

dewataaon kee dulaaree, dang hai nij apane hashr se

mit rahaa astitv ab to, ghut rahee bhaageerathee

·

kaun hai? sanjeewanee laae, use naw praan de

amriitaa mriit ho chalee, naazon palee bhaageerathee

·

jaag re insaan, kuch aise bhageerath yatn kar

khilakhilaae jyon punah, rotee huee bhaageerathee

·

*anubhooti men prakaashit*

·

---kalpanaa raamaanee

17 joon 2013

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

स्वर्ग के सुख त्यागकर, भू को चली भागीरथी

पर्वतों की गोद से, होकर बही भागीरथी

॥

कैद कर अपनी जटा में, शिव ने रोका था उसे

फिर बढ़ी गोमुख से हँसती, वेग सी भागीरथी

॥

धाम कहलाए सभी जो, राह में आए शहर

रुक गई हरिद्वार में, द्रुतगामिनी भागीरथी

॥

पाप धोए सर्व जन के, कष्ट भी सबके हरे

और पूजित भी हुई, वरदायिनी भागीरथी

॥

अब युगों की यह धरोहर, खो रही पहचान है

भव्य भव की भीड़ में, बेदम हुई भागीरथी

॥

घाट टूटे, पाट रूठे, जल प्रदूषित हो चला

कह रही है दास्ताँ, दुख से भरी भागीरथी

॥

देवताओं की दुलारी, दंग है निज अपने हश्र से

मिट रहा अस्तित्व अब तो, घुट रही भागीरथी

॥

कौन है? संजीवनी लाए, उसे नव प्राण दे

अमृता मृत हो चली, नाज़ों पली भागीरथी

॥

जाग रे इंसान, कुछ ऐसे भगीरथ यत्न कर

खिलखिलाए ज्यों पुनः, रोती हुई भागीरथी

॥

*अनुभूति में प्रकाशित*

॥

---कल्पना रामानी

१७ जून २०१३

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-कल्पना रामानी

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मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗