कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४ / २०४ № 4 of 204 रचना ४ / २०४
८ जुलाई २०१३ 8 July 2013 ८ जुलाई २०१३

भू को चली भागीरथी bhoo ko chalee bhaageerathee भू को चली भागीरथी

स्वर्ग के सुख त्यागकर, भू को चली भागीरथी

पर्वतों की गोद से, होकर बही भागीरथी

कैद कर अपनी जटा में, शिव ने रोका था उसे

फिर बढ़ी गोमुख से हँसती, वेग सी भागीरथी

धाम कहलाए सभी जो, राह में आए शहर

रुक गई हरिद्वार में, द्रुतगामिनी भागीरथी

पाप धोए सर्व जन के, कष्ट भी सबके हरे

और पूजित भी हुई, वरदायिनी भागीरथी

अब युगों की यह धरोहर, खो रही पहचान है

भव्य भव की भीड़ में, बेदम हुई भागीरथी

घाट टूटे, पाट रूठे, जल प्रदूषित हो चला

कह रही है दास्ताँ, दुख से भरी भागीरथी

देवताओं की दुलारी, दंग है निज अपने हश्र से

मिट रहा अस्तित्व अब तो, घुट रही भागीरथी

कौन है? संजीवनी लाए, उसे नव प्राण दे

अमृता मृत हो चली, नाज़ों पली भागीरथी

जाग रे इंसान, कुछ ऐसे भगीरथ यत्न कर

खिलखिलाए ज्यों पुनः, रोती हुई भागीरथी

*अनुभूति में प्रकाशित*

---कल्पना रामानी

१७ जून २०१३

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

svarg ke sukh tyaagakar, bhoo ko chalee bhaageerathee

parvaton kee god se, hokar bahee bhaageerathee

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kaid kar apanee jataa men, shiw ne rokaa thaa use

phir bढ़ee gomukh se hansatee, weg see bhaageerathee

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dhaam kahalaae sabhee jo, raah men aae shahar

ruk gaee haridvaar men, drutagaaminee bhaageerathee

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paap dhoe sarv jan ke, kasht bhee sabake hare

aur poojit bhee huee, waradaayinee bhaageerathee

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ab yugon kee yah dharohar, kho rahee pahachaan hai

bhavy bhaw kee bheed men, bedam huee bhaageerathee

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ghaat toote, paat roothe, jal pradooshit ho chalaa

kah rahee hai daastaan, dukh se bharee bhaageerathee

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dewataaon kee dulaaree, dang hai nij apane hashr se

mit rahaa astitv ab to, ghut rahee bhaageerathee

·

kaun hai? sanjeewanee laae, use naw praan de

amriitaa mriit ho chalee, naazon palee bhaageerathee

·

jaag re insaan, kuch aise bhageerath yatn kar

khilakhilaae jyon punah, rotee huee bhaageerathee

·

*anubhooti men prakaashit*

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---kalpanaa raamaanee

17 joon 2013

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

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-kalpanaa raamaanee

स्वर्ग के सुख त्यागकर, भू को चली भागीरथी

पर्वतों की गोद से, होकर बही भागीरथी

कैद कर अपनी जटा में, शिव ने रोका था उसे

फिर बढ़ी गोमुख से हँसती, वेग सी भागीरथी

धाम कहलाए सभी जो, राह में आए शहर

रुक गई हरिद्वार में, द्रुतगामिनी भागीरथी

पाप धोए सर्व जन के, कष्ट भी सबके हरे

और पूजित भी हुई, वरदायिनी भागीरथी

अब युगों की यह धरोहर, खो रही पहचान है

भव्य भव की भीड़ में, बेदम हुई भागीरथी

घाट टूटे, पाट रूठे, जल प्रदूषित हो चला

कह रही है दास्ताँ, दुख से भरी भागीरथी

देवताओं की दुलारी, दंग है निज अपने हश्र से

मिट रहा अस्तित्व अब तो, घुट रही भागीरथी

कौन है? संजीवनी लाए, उसे नव प्राण दे

अमृता मृत हो चली, नाज़ों पली भागीरथी

जाग रे इंसान, कुछ ऐसे भगीरथ यत्न कर

खिलखिलाए ज्यों पुनः, रोती हुई भागीरथी

*अनुभूति में प्रकाशित*

---कल्पना रामानी

१७ जून २०१३

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗