कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७ / २०५ № 7 of 205 रचना ७ / २०५
९ जुलाई २०१३ 9 July 2013 ९ जुलाई २०१३

विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते//गज़ल// wishv men aakaa hamaare yash kamaanaa chaahate//gazal// विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते//गज़ल//

वे सुना है चाँद पर बस्ती बसाना चाहते।

॥

विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते।

॥

लात सीनों पर जनों के, रख चढ़े थे सीढ़ियाँ,

॥

शीश पर अब पाँव रख, आकाश पाना चाहते।

॥

भर लिए गोदाम लेकिन, पेट भरता ही नहीं,

॥

दीन-दुखियों को निवाला, अब बनाना चाहते।

॥

बाँटते वैसाखियाँ, जन-जन को पहले कर अपंग,

॥

दर्द देकर बेरहम, मरहम लगाना चाहते।

॥

खूब दोहन कर निचोड़ा, उर्वरा भू को प्रथम,

॥

अब जनों के कंठ ही, शायद सुखाना चाहते।

॥

शहरियत से बाँधकर, बँधुआ किये ग्रामीण जन,

॥

निर्दयी, गाँवों की अब, जड़ ही मिटाना चाहते।

॥

सिर चढ़ी अंग्रेज़ियत, देशी दफन कर बोलियाँ,

॥

बदनियत फिर से, गुलामी को बुलाना चाहते।

॥

देश जाए या रसातल, या हो दुश्मन के अधीन,

॥

दे हवा आतंक को, कुर्सी बचाना चाहते।

॥

कोशिशें नापाक उनकी, खाक कर दें "कल्पना",

॥

खाक में जो स्वत्व जन-जन का मिलाना चाहते।

॥

-----कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

we sunaa hai chaand par bastee basaanaa chaahate

·

wishv men aakaa hamaare yash kamaanaa chaahate

·

laat seenon par janon ke, rakh chढ़e the seeढ़iyaan,

·

sheesh par ab paanv rakh, aakaash paanaa chaahate

·

bhar lie godaam lekin, pet bharataa hee naheen,

·

deen-dukhiyon ko niwaalaa, ab banaanaa chaahate

·

baantate waisaakhiyaan, jan-jan ko pahale kar apang,

·

dard dekar beraham, maraham lagaanaa chaahate

·

khoob dohan kar nichodaa, urvaraa bhoo ko pratham,

·

ab janon ke kanth hee, shaayad sukhaanaa chaahate

·

shahariyat se baandhakar, bandhuaa kiye graameen jan,

·

nirdayee, gaanvon kee ab, jad hee mitaanaa chaahate

·

sir chढ़ee angreziyat, deshee daphan kar boliyaan,

·

badaniyat phir se, gulaamee ko bulaanaa chaahate

·

desh jaae yaa rasaatal, yaa ho dushman ke adheen,

·

de hawaa aatank ko, kursee bachaanaa chaahate

·

koshishen naapaak unakee, khaak kar den "kalpanaa",

·

khaak men jo svatv jan-jan kaa milaanaa chaahate

·

-----kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

वे सुना है चाँद पर बस्ती बसाना चाहते।

॥

विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते।

॥

लात सीनों पर जनों के, रख चढ़े थे सीढ़ियाँ,

॥

शीश पर अब पाँव रख, आकाश पाना चाहते।

॥

भर लिए गोदाम लेकिन, पेट भरता ही नहीं,

॥

दीन-दुखियों को निवाला, अब बनाना चाहते।

॥

बाँटते वैसाखियाँ, जन-जन को पहले कर अपंग,

॥

दर्द देकर बेरहम, मरहम लगाना चाहते।

॥

खूब दोहन कर निचोड़ा, उर्वरा भू को प्रथम,

॥

अब जनों के कंठ ही, शायद सुखाना चाहते।

॥

शहरियत से बाँधकर, बँधुआ किये ग्रामीण जन,

॥

निर्दयी, गाँवों की अब, जड़ ही मिटाना चाहते।

॥

सिर चढ़ी अंग्रेज़ियत, देशी दफन कर बोलियाँ,

॥

बदनियत फिर से, गुलामी को बुलाना चाहते।

॥

देश जाए या रसातल, या हो दुश्मन के अधीन,

॥

दे हवा आतंक को, कुर्सी बचाना चाहते।

॥

कोशिशें नापाक उनकी, खाक कर दें "कल्पना",

॥

खाक में जो स्वत्व जन-जन का मिलाना चाहते।

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-----कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗