जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना jisake kar kamalon se ye ghar svarg saa banaa जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना
जिसके
कर कमलों से यह घर, स्वर्ग सा बना।
उस
माँ की हम, निस दिन मन से, करें वंदना।
जिसके
दम से, हैं जीवन में, सदा उजाले,
उसके
जीवन, में उजास की, रहे कामना।
जिसने
ममता, के आगे निज, किया निछावर,
उस
ममत्व को, करें नमन, रख शुद्ध भावना।
आजीवन
जो, रही दायिनी, संतति के हित,
उसके
हित के, लिए करे संतान प्रार्थना।
धूप
वरण कर, जिसने हमको सदा छाँव दी,
हम
उपाय वे करें न माँ को, छुए वेदना।
सारे
संचित पुण्य सौंपती, जो संतति को,
फर्ज़
यही, संतान उसे सौंपे न यातना।
जिस
देवी ने संस्कारों से सींचा हमको,
उसके
चूमें कदम, सफल तभी साध्य-साधना।
शीश
झुकाते सुर त्रिलोक के जिसके द्वारे,
वंचित
हो उस मातृ-प्रेम से कोई द्वार ना।
जिसने
पाया मूर्त मातृ-सुख इस जीवन में,
भव
में वो इंसान सुखी है सदा “कल्पना”
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
jisake
kar kamalon se yah ghar, svarg saa banaa
us
maan kee ham, nis din man se, karen wandanaa
jisake
dam se, hain jeewan men, sadaa ujaale,
usake
jeewan, men ujaas kee, rahe kaamanaa
jisane
mamataa, ke aage nij, kiyaa nichaawar,
us
mamatv ko, karen naman, rakh shuddh bhaawanaa
aajeewan
jo, rahee daayinee, santati ke hit,
usake
hit ke, lie kare santaan praarthanaa
dhoop
waran kar, jisane hamako sadaa chaanv dee,
ham
upaay we karen n maan ko, chue wedanaa
saare
sanchit puny saunpatee, jo santati ko,
pharz
yahee, santaan use saunpe n yaatanaa
jis
dewee ne sanskaaron se seenchaa hamako,
usake
choomen kadam, saphal tabhee saadhy-saadhanaa
sheesh
jhukaate sur trilok ke jisake dvaare,
wanchit
ho us maatrii-prem se koee dvaar naa
jisane
paayaa moort maatrii-sukh is jeewan men,
bhaw
men wo insaan sukhee hai sadaa “kalpanaa”
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
जिसके
कर कमलों से यह घर, स्वर्ग सा बना।
उस
माँ की हम, निस दिन मन से, करें वंदना।
जिसके
दम से, हैं जीवन में, सदा उजाले,
उसके
जीवन, में उजास की, रहे कामना।
जिसने
ममता, के आगे निज, किया निछावर,
उस
ममत्व को, करें नमन, रख शुद्ध भावना।
आजीवन
जो, रही दायिनी, संतति के हित,
उसके
हित के, लिए करे संतान प्रार्थना।
धूप
वरण कर, जिसने हमको सदा छाँव दी,
हम
उपाय वे करें न माँ को, छुए वेदना।
सारे
संचित पुण्य सौंपती, जो संतति को,
फर्ज़
यही, संतान उसे सौंपे न यातना।
जिस
देवी ने संस्कारों से सींचा हमको,
उसके
चूमें कदम, सफल तभी साध्य-साधना।
शीश
झुकाते सुर त्रिलोक के जिसके द्वारे,
वंचित
हो उस मातृ-प्रेम से कोई द्वार ना।
जिसने
पाया मूर्त मातृ-सुख इस जीवन में,
भव
में वो इंसान सुखी है सदा “कल्पना”
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी