कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ८१ / २०४ № 81 of 204 रचना ८१ / २०४
२९ मार्च २०१५ 29 March 2015 २९ मार्च २०१५

जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना jisake kar kamalon se ye ghar svarg saa banaa जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना

जिसके

कर कमलों से यह घर, स्वर्ग सा बना।

उस

माँ की हम, निस दिन मन से, करें वंदना।

जिसके

दम से, हैं जीवन में, सदा उजाले,

उसके

जीवन, में उजास की, रहे कामना।

जिसने

ममता, के आगे निज, किया निछावर,

उस

ममत्व को, करें नमन, रख शुद्ध भावना।

आजीवन

जो, रही दायिनी, संतति के हित,

उसके

हित के, लिए करे संतान प्रार्थना।

धूप

वरण कर, जिसने हमको सदा छाँव दी,

हम

उपाय वे करें न माँ को, छुए वेदना।

सारे

संचित पुण्य सौंपती, जो संतति को,

फर्ज़

यही, संतान उसे सौंपे न यातना।

जिस

देवी ने संस्कारों से सींचा हमको,

उसके

चूमें कदम, सफल तभी साध्य-साधना।

शीश

झुकाते सुर त्रिलोक के जिसके द्वारे,

वंचित

हो उस मातृ-प्रेम से कोई द्वार ना।

जिसने

पाया मूर्त मातृ-सुख इस जीवन में,

भव

में वो इंसान सुखी है सदा “कल्पना”

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jisake

kar kamalon se yah ghar, svarg saa banaa

·

us

maan kee ham, nis din man se, karen wandanaa

·

jisake

dam se, hain jeewan men, sadaa ujaale,

·

usake

jeewan, men ujaas kee, rahe kaamanaa

·

jisane

mamataa, ke aage nij, kiyaa nichaawar,

·

us

mamatv ko, karen naman, rakh shuddh bhaawanaa

·

aajeewan

jo, rahee daayinee, santati ke hit,

·

usake

hit ke, lie kare santaan praarthanaa

·

dhoop

waran kar, jisane hamako sadaa chaanv dee,

·

ham

upaay we karen n maan ko, chue wedanaa

·

saare

sanchit puny saunpatee, jo santati ko,

·

pharz

yahee, santaan use saunpe n yaatanaa

·

jis

dewee ne sanskaaron se seenchaa hamako,

·

usake

choomen kadam, saphal tabhee saadhy-saadhanaa

·

sheesh

jhukaate sur trilok ke jisake dvaare,

·

wanchit

ho us maatrii-prem se koee dvaar naa

·

jisane

paayaa moort maatrii-sukh is jeewan men,

·

bhaw

men wo insaan sukhee hai sadaa “kalpanaa”

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जिसके

कर कमलों से यह घर, स्वर्ग सा बना।

उस

माँ की हम, निस दिन मन से, करें वंदना।

जिसके

दम से, हैं जीवन में, सदा उजाले,

उसके

जीवन, में उजास की, रहे कामना।

जिसने

ममता, के आगे निज, किया निछावर,

उस

ममत्व को, करें नमन, रख शुद्ध भावना।

आजीवन

जो, रही दायिनी, संतति के हित,

उसके

हित के, लिए करे संतान प्रार्थना।

धूप

वरण कर, जिसने हमको सदा छाँव दी,

हम

उपाय वे करें न माँ को, छुए वेदना।

सारे

संचित पुण्य सौंपती, जो संतति को,

फर्ज़

यही, संतान उसे सौंपे न यातना।

जिस

देवी ने संस्कारों से सींचा हमको,

उसके

चूमें कदम, सफल तभी साध्य-साधना।

शीश

झुकाते सुर त्रिलोक के जिसके द्वारे,

वंचित

हो उस मातृ-प्रेम से कोई द्वार ना।

जिसने

पाया मूर्त मातृ-सुख इस जीवन में,

भव

में वो इंसान सुखी है सदा “कल्पना”

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗