कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ५९ / ६३ № 59 of 63 रचना ५९ / ६३
६ दिसम्बर २०१९ 6 December 2019 ६ दिसम्बर २०१९

हिंदी भाषा श्रेष्ठतम hindee bhaashaa shreshthatam हिंदी भाषा श्रेष्ठतम

हिन्दी भाषा श्रेष्ठतम, अद्भुत इसकी शान।

विविध विधागत काव्य से, भरी हुई यह खान

भरी हुई यह खान, अगर गहरे जाएँगे

मोती बहु अनमोल, हाथ अपने पाएँगे।

करें पूर्ण सम्मान, ‘कल्पना’ मन-अभिलाषा

अद्भुत इसकी शान, श्रेष्ठतम हिन्दी भाषा।

बहु भाषाएँ सीखिये, पर हिन्दी हो खास।

हिन्दी से ही बंधुओं, बढ़े आत्मविश्वास।

बढ़े आत्मविश्वास, महक इसमें है देशी

क्यों प्रसन्न हैं आप? चूमकर भाव विदेशी।

कहनी इतनी बात, देश की शान बढ़ाएँ

हिन्दी के ही बाद, सीखिये बहु भाषाएँ।

हिन्दी तेरे हाल पर, मन में उठे सवाल।

एक दिवस तेरे लिए, क्यों ना पूरा साल।

क्यों ना पूरा साल, तुझे सब हैं अपनाते

करके कुछ दिन ढोंग, साल भर फिर सो जाते।

शासन भी दिन रात, सदा अंग्रेजी टेरे

मन में उठे सवाल, हाल पर हिन्दी तेरे।

hindee bhaashaa shreshthatam, adbhut isakee shaan

wiwidh widhaagat kaavy se, bharee huee yah khaan

bharee huee yah khaan, agar gahare jaaenge

motee bahu anamol, haath apane paaenge

karen poorn sammaan, ‘kalpanaa’ man-abhilaashaa

adbhut isakee shaan, shreshthatam hindee bhaashaa

·

bahu bhaashaaen seekhiye, par hindee ho khaas

hindee se hee bandhuon, bढ़e aatmawishvaas

bढ़e aatmawishvaas, mahak isamen hai deshee

kyon prasann hain aap? choomakar bhaaw wideshee

kahanee itanee baat, desh kee shaan bढ़aaen

hindee ke hee baad, seekhiye bahu bhaashaaen

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hindee tere haal par, man men uthe sawaal

ek diwas tere lie, kyon naa pooraa saal

kyon naa pooraa saal, tujhe sab hain apanaate

karake kuch din dhong, saal bhar phir so jaate

shaasan bhee din raat, sadaa angrejee tere

man men uthe sawaal, haal par hindee tere

हिन्दी भाषा श्रेष्ठतम, अद्भुत इसकी शान।

विविध विधागत काव्य से, भरी हुई यह खान

भरी हुई यह खान, अगर गहरे जाएँगे

मोती बहु अनमोल, हाथ अपने पाएँगे।

करें पूर्ण सम्मान, ‘कल्पना’ मन-अभिलाषा

अद्भुत इसकी शान, श्रेष्ठतम हिन्दी भाषा।

बहु भाषाएँ सीखिये, पर हिन्दी हो खास।

हिन्दी से ही बंधुओं, बढ़े आत्मविश्वास।

बढ़े आत्मविश्वास, महक इसमें है देशी

क्यों प्रसन्न हैं आप? चूमकर भाव विदेशी।

कहनी इतनी बात, देश की शान बढ़ाएँ

हिन्दी के ही बाद, सीखिये बहु भाषाएँ।

हिन्दी तेरे हाल पर, मन में उठे सवाल।

एक दिवस तेरे लिए, क्यों ना पूरा साल।

क्यों ना पूरा साल, तुझे सब हैं अपनाते

करके कुछ दिन ढोंग, साल भर फिर सो जाते।

शासन भी दिन रात, सदा अंग्रेजी टेरे

मन में उठे सवाल, हाल पर हिन्दी तेरे।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗