ये बनफूल ye banaphool ये बनफूल
दीनों की दुनिया अलग, होती सबसे खास।
आशाओं की पोटली, रहती इनके पास।
चाहे खरपतवार हो, या बिखरे हों शूल।
हर विपदा के बाग में, खिलते ये बनफूल।
बाधाओं की बाढ़ में, जीवन हो दुश्वार।
थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत की पतवार।
छूटे चाहे आशियाँ, या रूठे तकदीर।
मगर नहीं है टूटता, इनके मन का धीर।
शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत
बारिशभी इनके लिए, कब लिखती नवगीत
हाकिम इनके हाल पर, करते केवल शोर।
इनकी काली रात की, कभी न होती भोर।
यही प्रार्थना, 'कल्पना', इनको मिले प्रकाश।
विषम भूमि इस देशकी, समहो पाती काश!
deenon kee duniyaa alag, hotee sabase khaas
aashaaon kee potalee, rahatee inake paas
chaahe kharapatawaar ho, yaa bikhare hon shool
har wipadaa ke baag men, khilate ye banaphool
baadhaaon kee baaढ़ men, jeewan ho dushvaar
thaame rahate kintu ye, himmat kee patawaar
choote chaahe aashiyaan, yaa roothe takadeer
magar naheen hai tootataa, inake man kaa dheer
sheet, taap, himapaat ko, sahaj maanate meet
baarishabhee inake lie, kab likhatee nawageet
haakim inake haal par, karate kewal shor
inakee kaalee raat kee, kabhee n hotee bhor
yahee praarthanaa, 'kalpanaa', inako mile prakaash
wisham bhoomi is deshakee, samaho paatee kaash!
दीनों की दुनिया अलग, होती सबसे खास।
आशाओं की पोटली, रहती इनके पास।
चाहे खरपतवार हो, या बिखरे हों शूल।
हर विपदा के बाग में, खिलते ये बनफूल।
बाधाओं की बाढ़ में, जीवन हो दुश्वार।
थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत की पतवार।
छूटे चाहे आशियाँ, या रूठे तकदीर।
मगर नहीं है टूटता, इनके मन का धीर।
शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत
बारिशभी इनके लिए, कब लिखती नवगीत
हाकिम इनके हाल पर, करते केवल शोर।
इनकी काली रात की, कभी न होती भोर।
यही प्रार्थना, 'कल्पना', इनको मिले प्रकाश।
विषम भूमि इस देशकी, समहो पाती काश!