कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६४ / ६५ № 64 of 65 रचना ६४ / ६५
५ दिसम्बर २०१९ 5 December 2019 ५ दिसम्बर २०१९

ये बनफूल ye banaphool ये बनफूल

दीनों की दुनिया अलग, होती सबसे खास।

आशाओं की पोटली, रहती इनके पास।

चाहे खरपतवार हो, या बिखरे हों शूल।

हर विपदा के बाग में, खिलते ये बनफूल।

बाधाओं की बाढ़ में, जीवन हो दुश्वार।

थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत की पतवार।

छूटे चाहे आशियाँ, या रूठे तकदीर।

मगर नहीं है टूटता, इनके मन का धीर।

शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत

बारिशभी इनके लिए, कब लिखती नवगीत

हाकिम इनके हाल पर, करते केवल शोर।

इनकी काली रात की, कभी न होती भोर।

यही प्रार्थना, 'कल्पना', इनको मिले प्रकाश।

विषम भूमि इस देशकी, समहो पाती काश!

deenon kee duniyaa alag, hotee sabase khaas

aashaaon kee potalee, rahatee inake paas

·

chaahe kharapatawaar ho, yaa bikhare hon shool

har wipadaa ke baag men, khilate ye banaphool

·

baadhaaon kee baaढ़ men, jeewan ho dushvaar

thaame rahate kintu ye, himmat kee patawaar

·

choote chaahe aashiyaan, yaa roothe takadeer

magar naheen hai tootataa, inake man kaa dheer

·

sheet, taap, himapaat ko, sahaj maanate meet

baarishabhee inake lie, kab likhatee nawageet

·

haakim inake haal par, karate kewal shor

inakee kaalee raat kee, kabhee n hotee bhor

·

yahee praarthanaa, 'kalpanaa', inako mile prakaash

wisham bhoomi is deshakee, samaho paatee kaash!

दीनों की दुनिया अलग, होती सबसे खास।

आशाओं की पोटली, रहती इनके पास।

चाहे खरपतवार हो, या बिखरे हों शूल।

हर विपदा के बाग में, खिलते ये बनफूल।

बाधाओं की बाढ़ में, जीवन हो दुश्वार।

थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत की पतवार।

छूटे चाहे आशियाँ, या रूठे तकदीर।

मगर नहीं है टूटता, इनके मन का धीर।

शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत

बारिशभी इनके लिए, कब लिखती नवगीत

हाकिम इनके हाल पर, करते केवल शोर।

इनकी काली रात की, कभी न होती भोर।

यही प्रार्थना, 'कल्पना', इनको मिले प्रकाश।

विषम भूमि इस देशकी, समहो पाती काश!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗