कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४८ / १६४ № 148 of 164 रचना १४८ / १६४
३ दिसम्बर २०१९ 3 December 2019 ३ दिसम्बर २०१९

कलम गहो हलधर kalam gaho haladhar कलम गहो हलधर

रच लो

जीवन-गीत, कर्म की

॥

कलम गहो हलधर!

॥

सींचो क्यारी, भाव जगेंगे

॥

बीज डाल दो

शब्द उगेंगे

॥

जब आएगी फसल

झूमती

॥

सारे सुर, लय-ताल बनेंगे

॥

किलकेगी कविता, तुम केवल

॥

नींद तजो

हलधर!

॥

देख रहे हल

राह तुम्हारी

॥

बदरा बुला रहे

जलधारी

॥

घर, संसार-सुखों की खातिर

॥

तुम्हें जीतनी

है यह पारी

॥

बहुरेंगे दिन, बस थोड़ा सा

॥

धीर धरो हलधर!

॥

तुम सोए, जग सो जाएगा

जीव प्रलय में

खो जाएगा

rach lo

jeewan-geet, karm kee

·

kalam gaho haladhar!

·

seencho kyaaree, bhaaw jagenge

·

beej daal do

shabd ugenge

·

jab aaegee phasal

jhoomatee

·

saare sur, lay-taal banenge

·

kilakegee kawitaa, tum kewal

·

neend tajo

haladhar!

·

dekh rahe hal

raah tumhaaree

·

badaraa bulaa rahe

jaladhaaree

·

ghar, sansaar-sukhon kee khaatir

·

tumhen jeetanee

hai yah paaree

·

bahurenge din, bas thodaa saa

·

dheer dharo haladhar!

·

tum soe, jag so jaaegaa

jeew pralay men

kho jaaegaa

रच लो

जीवन-गीत, कर्म की

॥

कलम गहो हलधर!

॥

सींचो क्यारी, भाव जगेंगे

॥

बीज डाल दो

शब्द उगेंगे

॥

जब आएगी फसल

झूमती

॥

सारे सुर, लय-ताल बनेंगे

॥

किलकेगी कविता, तुम केवल

॥

नींद तजो

हलधर!

॥

देख रहे हल

राह तुम्हारी

॥

बदरा बुला रहे

जलधारी

॥

घर, संसार-सुखों की खातिर

॥

तुम्हें जीतनी

है यह पारी

॥

बहुरेंगे दिन, बस थोड़ा सा

॥

धीर धरो हलधर!

॥

तुम सोए, जग सो जाएगा

जीव प्रलय में

खो जाएगा

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗