कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४७ / १६३ № 147 of 163 रचना १४७ / १६३
३ दिसम्बर २०१९ 3 December 2019 ३ दिसम्बर २०१९

कलम गहो हलधर kalam gaho haladhar कलम गहो हलधर

रच लो

जीवन-गीत, कर्म की

कलम गहो हलधर!

सींचो क्यारी, भाव जगेंगे

बीज डाल दो

शब्द उगेंगे

जब आएगी फसल

झूमती

सारे सुर, लय-ताल बनेंगे

किलकेगी कविता, तुम केवल

नींद तजो

हलधर!

देख रहे हल

राह तुम्हारी

बदरा बुला रहे

जलधारी

घर, संसार-सुखों की खातिर

तुम्हें जीतनी

है यह पारी

बहुरेंगे दिन, बस थोड़ा सा

धीर धरो हलधर!

तुम सोए, जग सो जाएगा

जीव प्रलय में

खो जाएगा

rach lo

jeewan-geet, karm kee

·

kalam gaho haladhar!

·

seencho kyaaree, bhaaw jagenge

·

beej daal do

shabd ugenge

·

jab aaegee phasal

jhoomatee

·

saare sur, lay-taal banenge

·

kilakegee kawitaa, tum kewal

·

neend tajo

haladhar!

·

dekh rahe hal

raah tumhaaree

·

badaraa bulaa rahe

jaladhaaree

·

ghar, sansaar-sukhon kee khaatir

·

tumhen jeetanee

hai yah paaree

·

bahurenge din, bas thodaa saa

·

dheer dharo haladhar!

·

tum soe, jag so jaaegaa

jeew pralay men

kho jaaegaa

रच लो

जीवन-गीत, कर्म की

कलम गहो हलधर!

सींचो क्यारी, भाव जगेंगे

बीज डाल दो

शब्द उगेंगे

जब आएगी फसल

झूमती

सारे सुर, लय-ताल बनेंगे

किलकेगी कविता, तुम केवल

नींद तजो

हलधर!

देख रहे हल

राह तुम्हारी

बदरा बुला रहे

जलधारी

घर, संसार-सुखों की खातिर

तुम्हें जीतनी

है यह पारी

बहुरेंगे दिन, बस थोड़ा सा

धीर धरो हलधर!

तुम सोए, जग सो जाएगा

जीव प्रलय में

खो जाएगा

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗