कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११४ / १६४ № 114 of 164 रचना ११४ / १६४
६ सितम्बर २०१५ 6 September 2015 ६ सितम्बर २०१५

दिदिया के दो हाथ didiyaa ke do haath दिदिया के दो हाथ

वहाँ महल में जश्न

यहाँ

॥

भूखी कुटिया में

॥

दिदिया के दो हाथ, सूपड़ा

॥

फटक रहे हैं।

॥

अन्न जुटाया कुछ

दिदिया ने

॥

रंग-रंग के उसमें

दाने।

॥

शीत फाँकता चूल्हा

कल से

॥

ताक रहा है गात

तपाने।

॥

यहाँ खुला मैला जल-पोखर

॥

वहाँ महल के

॥

स्वच्छ ताल में, अंग लचीले

॥

मटक रहे हैं।

॥

भूसी खाकर भूखी

गैया

॥

दूध सवाया देगी

मैया।

॥

पा लेगी वो उन

महलों से

॥

पय के बदले

wahaan mahal men jashn

yahaan

·

bhookhee kutiyaa men

·

didiyaa ke do haath, soopadaa

·

phatak rahe hain

·

ann jutaayaa kuch

didiyaa ne

·

rang-rang ke usamen

daane

·

sheet phaankataa choolhaa

kal se

·

taak rahaa hai gaat

tapaane

·

yahaan khulaa mailaa jal-pokhar

·

wahaan mahal ke

·

svachch taal men, ang lacheele

·

matak rahe hain

·

bhoosee khaakar bhookhee

gaiyaa

·

doodh sawaayaa degee

maiyaa

·

paa legee wo un

mahalon se

·

pay ke badale

वहाँ महल में जश्न

यहाँ

॥

भूखी कुटिया में

॥

दिदिया के दो हाथ, सूपड़ा

॥

फटक रहे हैं।

॥

अन्न जुटाया कुछ

दिदिया ने

॥

रंग-रंग के उसमें

दाने।

॥

शीत फाँकता चूल्हा

कल से

॥

ताक रहा है गात

तपाने।

॥

यहाँ खुला मैला जल-पोखर

॥

वहाँ महल के

॥

स्वच्छ ताल में, अंग लचीले

॥

मटक रहे हैं।

॥

भूसी खाकर भूखी

गैया

॥

दूध सवाया देगी

मैया।

॥

पा लेगी वो उन

महलों से

॥

पय के बदले

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗