कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११४ / १६३ № 114 of 163 रचना ११४ / १६३
६ सितम्बर २०१५ 6 September 2015 ६ सितम्बर २०१५

दिदिया के दो हाथ didiyaa ke do haath दिदिया के दो हाथ

वहाँ महल में जश्न

यहाँ

भूखी कुटिया में

दिदिया के दो हाथ, सूपड़ा

फटक रहे हैं।

अन्न जुटाया कुछ

दिदिया ने

रंग-रंग के उसमें

दाने।

शीत फाँकता चूल्हा

कल से

ताक रहा है गात

तपाने।

यहाँ खुला मैला जल-पोखर

वहाँ महल के

स्वच्छ ताल में, अंग लचीले

मटक रहे हैं।

भूसी खाकर भूखी

गैया

दूध सवाया देगी

मैया।

पा लेगी वो उन

महलों से

पय के बदले

wahaan mahal men jashn

yahaan

·

bhookhee kutiyaa men

·

didiyaa ke do haath, soopadaa

·

phatak rahe hain

·

ann jutaayaa kuch

didiyaa ne

·

rang-rang ke usamen

daane

·

sheet phaankataa choolhaa

kal se

·

taak rahaa hai gaat

tapaane

·

yahaan khulaa mailaa jal-pokhar

·

wahaan mahal ke

·

svachch taal men, ang lacheele

·

matak rahe hain

·

bhoosee khaakar bhookhee

gaiyaa

·

doodh sawaayaa degee

maiyaa

·

paa legee wo un

mahalon se

·

pay ke badale

वहाँ महल में जश्न

यहाँ

भूखी कुटिया में

दिदिया के दो हाथ, सूपड़ा

फटक रहे हैं।

अन्न जुटाया कुछ

दिदिया ने

रंग-रंग के उसमें

दाने।

शीत फाँकता चूल्हा

कल से

ताक रहा है गात

तपाने।

यहाँ खुला मैला जल-पोखर

वहाँ महल के

स्वच्छ ताल में, अंग लचीले

मटक रहे हैं।

भूसी खाकर भूखी

गैया

दूध सवाया देगी

मैया।

पा लेगी वो उन

महलों से

पय के बदले

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗