कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६० / ६५ № 60 of 65 रचना ६० / ६५
५ सितम्बर २०१५ 5 September 2015 ५ सितम्बर २०१५

फिर से आओ कृष्ण जी phir se aao kriishn jee फिर से आओ कृष्ण जी

फिर से आओ कृष्ण जी, देखो कलियुग घोर।

नाम तुम्हारा ओढ़ते, भाँति-भाँति के चोर।

कंस बली हैं आज के, तुम्हें न देंगे ताज।

ताज पहन यदि आ गए, झपट पड़ेंगे बाज।

दधि-माखन से खेलते, वे दिन जाना भूल।

शीत-गृहों में रक्ष

है, अब नवनीत अमूल।

कुदरत से खिलवाड़ कर, मद में है मनु चूर।

तर होते पनघट नहीं, और न यमुना पूर।

उस युग में तुम बो

गए, रिश्तों में

सद्भाव।

अब है रिश्ता एक

phir se aao kriishn jee, dekho kaliyug ghor

·

naam tumhaaraa oढ़te, bhaanti-bhaanti ke chor

·

kans balee hain aaj ke, tumhen n denge taaj

·

taaj pahan yadi aa gae, jhapat padenge baaj

·

dadhi-maakhan se khelate, we din jaanaa bhool

·

sheet-griihon men raksh

hai, ab nawaneet amool

·

kudarat se khilawaad kar, mad men hai manu choor

·

tar hote panaghat naheen, aur n yamunaa poor

·

us yug men tum bo

gae, rishton men

sadbhaaw

·

ab hai rishtaa ek

फिर से आओ कृष्ण जी, देखो कलियुग घोर।

नाम तुम्हारा ओढ़ते, भाँति-भाँति के चोर।

कंस बली हैं आज के, तुम्हें न देंगे ताज।

ताज पहन यदि आ गए, झपट पड़ेंगे बाज।

दधि-माखन से खेलते, वे दिन जाना भूल।

शीत-गृहों में रक्ष

है, अब नवनीत अमूल।

कुदरत से खिलवाड़ कर, मद में है मनु चूर।

तर होते पनघट नहीं, और न यमुना पूर।

उस युग में तुम बो

गए, रिश्तों में

सद्भाव।

अब है रिश्ता एक

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗