कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०४ / २०५ № 104 of 205 रचना १०४ / २०५
३ सितम्बर २०१५ 3 September 2015 ३ सितम्बर २०१५

कब मिलोगे मीत kab miloge meet कब मिलोगे मीत

कब

मिलोगे मीत, इस बाबत लिखा है।

॥

प्यार

से मैंने, तुम्हें यह ख़त लिखा है।

॥

मन

तुम्हारा क्या मुझे अब भूल बैठा?

॥

या

कि तुमको अब नहीं फुर्सत, लिखा है।

॥

दिल

धड़कता है तुम्हारा नाम लेकर

॥

इस

हृदय की हो तुम्हीं ताकत, लिखा है

॥

ज़िंदगी

में बस तुम्हें चाहा-सराहा

॥

हो

न अब चाहत मेरी आहत, लिखा है

॥

रूठना

या मान करना माना लेकिन

॥

मत

लगाना प्यार पर तोहमत, लिखा है।

॥

हो

नहीं पाषाण तुम, मैं जानती हूँ

॥

मन

खँगालो, मोम के पर्वत! लिखा है।

॥

‘कल्पना’ हो एक छोटा घर हमारा

॥

बस

यही है अब मेरी हसरत, लिखा है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

kab

miloge meet, is baabat likhaa hai

·

pyaar

se mainne, tumhen yah kat likhaa hai

·

man

tumhaaraa kyaa mujhe ab bhool baithaa?

·

yaa

ki tumako ab naheen phursat, likhaa hai

·

dil

dhadakataa hai tumhaaraa naam lekar

·

is

hriiday kee ho tumheen taakat, likhaa hai

·

zindagee

men bas tumhen chaahaa-saraahaa

·

ho

n ab chaahat meree aahat, likhaa hai

·

roothanaa

yaa maan karanaa maanaa lekin

·

mat

lagaanaa pyaar par tohamat, likhaa hai

·

ho

naheen paashaan tum, main jaanatee hoon

·

man

khangaalo, mom ke parvat! likhaa hai

·

‘kalpanaa’ ho ek chotaa ghar hamaaraa

·

bas

yahee hai ab meree hasarat, likhaa hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कब

मिलोगे मीत, इस बाबत लिखा है।

॥

प्यार

से मैंने, तुम्हें यह ख़त लिखा है।

॥

मन

तुम्हारा क्या मुझे अब भूल बैठा?

॥

या

कि तुमको अब नहीं फुर्सत, लिखा है।

॥

दिल

धड़कता है तुम्हारा नाम लेकर

॥

इस

हृदय की हो तुम्हीं ताकत, लिखा है

॥

ज़िंदगी

में बस तुम्हें चाहा-सराहा

॥

हो

न अब चाहत मेरी आहत, लिखा है

॥

रूठना

या मान करना माना लेकिन

॥

मत

लगाना प्यार पर तोहमत, लिखा है।

॥

हो

नहीं पाषाण तुम, मैं जानती हूँ

॥

मन

खँगालो, मोम के पर्वत! लिखा है।

॥

‘कल्पना’ हो एक छोटा घर हमारा

॥

बस

यही है अब मेरी हसरत, लिखा है।

॥

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗