कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८० / २०४ № 180 of 204 रचना १८० / २०४
७ दिसम्बर २०१९ 7 December 2019 ७ दिसम्बर २०१९

तुम वही हो क्या tum wahee ho kyaa तुम वही हो क्या

ज़िन्दगी से सवाल

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या?

मेरी हमराह  ज़िंदगी हो क्या?

कल तो हिरनी बनी उछलती रही

क्या हुआ आज  थक गई हो क्या?

ऐ बहारों की बोलती बुलबुल

क्यों हुई मौन  बंदिनी हो क्या?

ढूँढती हूँ तुम्हें उजालों में

तुम अँधेरों से जा मिली हो क्या?

महफिलें अब नहीं सुहातीं तुम्हें?

कोई गुज़री हुई सदी हो क्या?

क्यों मेरे हौसले घटाती हो

मेरी सरकार  दिल-जली हो क्या?

थी नदी चंचला उफनती हुई

सागरों से भला डरी हो क्या?

सुन रही हो  कि जो कहा मैंने?

कोई फरियाद अनसुनी हो क्या?

“कल्पना” मैं कसूरवार नहीं

रूठकर जा रही सखी हो क्या?

zindagee se sawaal

·

jisako chaahaa thaa tum wahee ho kyaa?

meree hamaraah zindagee ho kyaa?

·

kal to hiranee banee uchalatee rahee

kyaa huaa aaj thak gaee ho kyaa?

·

ai bahaaron kee bolatee bulabul

kyon huee maun bandinee ho kyaa?

·

dhoondhatee hoon tumhen ujaalon men

tum andheron se jaa milee ho kyaa?

·

mahaphilen ab naheen suhaateen tumhen?

koee guzaree huee sadee ho kyaa?

·

kyon mere hausale ghataatee ho

meree sarakaar dil-jalee ho kyaa?

·

thee nadee chanchalaa uphanatee huee

saagaron se bhalaa daree ho kyaa?

·

sun rahee ho ki jo kahaa mainne?

koee phariyaad anasunee ho kyaa?

·

“kalpanaa” main kasoorawaar naheen

roothakar jaa rahee sakhee ho kyaa?

ज़िन्दगी से सवाल

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या?

मेरी हमराह  ज़िंदगी हो क्या?

कल तो हिरनी बनी उछलती रही

क्या हुआ आज  थक गई हो क्या?

ऐ बहारों की बोलती बुलबुल

क्यों हुई मौन  बंदिनी हो क्या?

ढूँढती हूँ तुम्हें उजालों में

तुम अँधेरों से जा मिली हो क्या?

महफिलें अब नहीं सुहातीं तुम्हें?

कोई गुज़री हुई सदी हो क्या?

क्यों मेरे हौसले घटाती हो

मेरी सरकार  दिल-जली हो क्या?

थी नदी चंचला उफनती हुई

सागरों से भला डरी हो क्या?

सुन रही हो  कि जो कहा मैंने?

कोई फरियाद अनसुनी हो क्या?

“कल्पना” मैं कसूरवार नहीं

रूठकर जा रही सखी हो क्या?

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗