कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४८ / १६३ № 148 of 163 रचना १४८ / १६३
८ दिसम्बर २०१९ 8 December 2019 ८ दिसम्बर २०१९

समीक्षा- पूर्णिमा वर्मन sameekshaa- poornimaa warman समीक्षा- पूर्णिमा वर्मन

कल्पना रामानी एक जीता जागता चमत्कार--पूर्णिमा वर्मन

कल्पना रामानी जी इंटरनेट और वेब का एक जीता जागता चमत्कार हैं। अगर इंटरनेट न होता तो हम इस चमत्कार से वंचित रह जाते। एक ऐसा चमत्कार जो देखते ही देखते एक सामान्य गृहणी को जानी-मानी रचनाकार के रूप में हम सबके प्रकट कर दे। ऐसा कहना उनके अपने श्रम को नकारना नहीं है, बेशक उनमें प्रतिभा, लगन और मेधा का बीज कहीं छुपा था जो इंटरनेट की विभिन्न धाराओं से सिंचकर पल्लवित हो गया।

अभी कल की ही बात थी कि फेसबुक पर उनसे परिचय हुआ था। भोली-भाली, सीधी-साधी महिला, कविता में रुचि रखने वाली कुछ न कुछ लिखने वाली और पूरी तरह से अनाश्वस्त कि जो लिख रही हैं वह कैसा है, लेकिन साल बीतते न बीतते वे कविता की तमाम विधाओं को पूरी आश्वस्ति से समझने लगी थीं। हमारे अभिव्यक्ति के फेसबुक समूह और नवगीत की पाठशाला में उन जैसा मेधावी कोई सदस्य नहीं। जिस तेजी से उन्होंने छंद और लय को समझा, आत्मसात किया और कविताओं में रचा, वह आश्चर्य चकित कर देने वाला था। गीत, दोहे, कुंडलिया और फिर गजल वे हर विधा की बारीकियों में निष्णात होती चली गईं।

आज वे अभिव्यक्ति एवं अनुभूति के संपादक मंडल का हिस्सा हैं और उनके हौसलों की उड़ान देश विदेश में पहुँच जाने वाली है। उनके शिल्प और संवेदना पर बहुत कहने की आवश्यकता नहीं क्यों कि वह आपके हाथों में है। रचना का जादू मन मोहे तो फिर कहने को कुछ बचता नहीं। उनका सान्निध्य अपने आप में एक उपहार है। उनकी रचनाओं के द्वारा यह उपहार सभी पाठकों तक पहुँचे। यह जादू बना रहे और नये नये चमत्कार हमें देखने को मिलें यही मंगलकामना है।

पूर्णिमा वर्मन

संपादक अभिव्यक्ति / अनुभूति

kalpanaa raamaanee ek jeetaa jaagataa chamatkaar--poornimaa warman

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kalpanaa raamaanee jee intaranet aur web kaa ek jeetaa jaagataa chamatkaar hain agar intaranet n hotaa to ham is chamatkaar se wanchit rah jaate ek aisaa chamatkaar jo dekhate hee dekhate ek saamaany griihanee ko jaanee-maanee rachanaakaar ke roop men ham sabake prakat kar de aisaa kahanaa unake apane shram ko nakaaranaa naheen hai, beshak unamen pratibhaa, lagan aur medhaa kaa beej kaheen chupaa thaa jo intaranet kee wibhinn dhaaraaon se sinchakar pallawit ho gayaa

abhee kal kee hee baat thee ki phesabuk par unase parichay huaa thaa bholee-bhaalee, seedhee-saadhee mahilaa, kawitaa men ruchi rakhane waalee kuch n kuch likhane waalee aur pooree tarah se anaashvast ki jo likh rahee hain wah kaisaa hai, lekin saal beetate n beetate we kawitaa kee tamaam widhaaon ko pooree aashvasti se samajhane lagee theen hamaare abhivyakti ke phesabuk samooh aur nawageet kee paathashaalaa men un jaisaa medhaawee koee sadasy naheen jis tejee se unhonne chand aur lay ko samajhaa, aatmasaat kiyaa aur kawitaaon men rachaa, wah aashchary chakit kar dene waalaa thaa geet, dohe, kundaliyaa aur phir gajal we har widhaa kee baareekiyon men nishnaat hotee chalee gaeen

aaj we abhivyakti ewan anubhooti ke sanpaadak mandal kaa hissaa hain aur unake hausalon kee ud़aan desh widesh men pahunch jaane waalee hai unake shilp aur sanvedanaa par bahut kahane kee aawashyakataa naheen kyon ki wah aapake haathon men hai rachanaa kaa jaadoo man mohe to phir kahane ko kuch bachataa naheen unakaa saannidhy apane aap men ek upahaar hai unakee rachanaaon ke dvaaraa yah upahaar sabhee paathakon tak pahunche yah jaadoo banaa rahe aur naye naye chamatkaar hamen dekhane ko milen yahee mangalakaamanaa hai

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poornimaa warman

sanpaadak abhivyakti / anubhooti

कल्पना रामानी एक जीता जागता चमत्कार--पूर्णिमा वर्मन

कल्पना रामानी जी इंटरनेट और वेब का एक जीता जागता चमत्कार हैं। अगर इंटरनेट न होता तो हम इस चमत्कार से वंचित रह जाते। एक ऐसा चमत्कार जो देखते ही देखते एक सामान्य गृहणी को जानी-मानी रचनाकार के रूप में हम सबके प्रकट कर दे। ऐसा कहना उनके अपने श्रम को नकारना नहीं है, बेशक उनमें प्रतिभा, लगन और मेधा का बीज कहीं छुपा था जो इंटरनेट की विभिन्न धाराओं से सिंचकर पल्लवित हो गया।

अभी कल की ही बात थी कि फेसबुक पर उनसे परिचय हुआ था। भोली-भाली, सीधी-साधी महिला, कविता में रुचि रखने वाली कुछ न कुछ लिखने वाली और पूरी तरह से अनाश्वस्त कि जो लिख रही हैं वह कैसा है, लेकिन साल बीतते न बीतते वे कविता की तमाम विधाओं को पूरी आश्वस्ति से समझने लगी थीं। हमारे अभिव्यक्ति के फेसबुक समूह और नवगीत की पाठशाला में उन जैसा मेधावी कोई सदस्य नहीं। जिस तेजी से उन्होंने छंद और लय को समझा, आत्मसात किया और कविताओं में रचा, वह आश्चर्य चकित कर देने वाला था। गीत, दोहे, कुंडलिया और फिर गजल वे हर विधा की बारीकियों में निष्णात होती चली गईं।

आज वे अभिव्यक्ति एवं अनुभूति के संपादक मंडल का हिस्सा हैं और उनके हौसलों की उड़ान देश विदेश में पहुँच जाने वाली है। उनके शिल्प और संवेदना पर बहुत कहने की आवश्यकता नहीं क्यों कि वह आपके हाथों में है। रचना का जादू मन मोहे तो फिर कहने को कुछ बचता नहीं। उनका सान्निध्य अपने आप में एक उपहार है। उनकी रचनाओं के द्वारा यह उपहार सभी पाठकों तक पहुँचे। यह जादू बना रहे और नये नये चमत्कार हमें देखने को मिलें यही मंगलकामना है।

पूर्णिमा वर्मन

संपादक अभिव्यक्ति / अनुभूति

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗