बदरा कारे badaraa kaare बदरा कारे
मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात।
ढोल बजाने आ गए, बादल बिजली साथ।
बादल बिजली साथ, हो गई पुलकित धरती
ओढ़ चुनरिया सब्ज़, दिख रही जलकण भरती।
बिखरे रंग अपार, हुआ खुशियों का संगम
मन को भाया खूब, रूप बरसाती-मौसम।
बच्चों ने मिलकर किया, बूँदों का घेराव।
चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव।
लो कागज की नाव, संग गूँजी किलकारी
जल थल हुए समान, खिल उठी धरती सारी।
मौसम का उल्लास, छा गया सबके दिल पर
बूँदों का घेराव, किया बच्चों ने मिलकर।
बादल की मनुहार से, जाग उठे उद्यान।
पत्ते पत्ते ने किया, जल धारा में स्नान।
जलधारा में स्नान, खिल उठीं कोमल कलियाँ
मधुप कर उठे गान, उड़ीं चहुँ ओर तितलियाँ।
लहराया नम, शीत, पवन पुरवा का आँचल
जाग उठे उद्यान, देख बरसाती बादल।
बदरा कारे जा वहाँ, जहाँ सूखते खेत।
बंजर धरती हो चली, ज्यों मरुथल की रेत।
ज्यों मरुथल की रेत, फसल से सावन रूठा।
वादा कर आषाढ़, न बरसा वो भी झूठा।
कहना मेरा मान, “कल्पना” कहती प्यारे
जहाँ सूखते खेत, चला जा बदरा कारे।
mausam hai barasaat kaa, boondon kee baaraat
dhol bajaane aa gae, baadal bijalee saath
baadal bijalee saath, ho gaee pulakit dharatee
oढ़ chunariyaa sabz, dikh rahee jalakan bharatee
bikhare rang apaar, huaa khushiyon kaa sangam
man ko bhaayaa khoob, roop barasaatee-mausam
bachchon ne milakar kiyaa, boondon kaa gheraaw
chalee suhaanee sair ko, lo kaagaz kee naaw
lo kaagaj kee naaw, sang goonjee kilakaaree
jal thal hue samaan, khil uthee dharatee saaree
mausam kaa ullaas, chaa gayaa sabake dil par
boondon kaa gheraaw, kiyaa bachchon ne milakar
baadal kee manuhaar se, jaag uthe udyaan
patte patte ne kiyaa, jal dhaaraa men snaan
jaladhaaraa men snaan, khil utheen komal kaliyaan
madhup kar uthe gaan, udeen chahun or titaliyaan
laharaayaa nam, sheet, pawan purawaa kaa aanchal
jaag uthe udyaan, dekh barasaatee baadal
badaraa kaare jaa wahaan, jahaan sookhate khet
banjar dharatee ho chalee, jyon maruthal kee ret
jyon maruthal kee ret, phasal se saawan roothaa
waadaa kar aashaaढ़, n barasaa wo bhee jhoothaa
kahanaa meraa maan, “kalpanaa” kahatee pyaare
jahaan sookhate khet, chalaa jaa badaraa kaare
मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात।
ढोल बजाने आ गए, बादल बिजली साथ।
बादल बिजली साथ, हो गई पुलकित धरती
ओढ़ चुनरिया सब्ज़, दिख रही जलकण भरती।
बिखरे रंग अपार, हुआ खुशियों का संगम
मन को भाया खूब, रूप बरसाती-मौसम।
बच्चों ने मिलकर किया, बूँदों का घेराव।
चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव।
लो कागज की नाव, संग गूँजी किलकारी
जल थल हुए समान, खिल उठी धरती सारी।
मौसम का उल्लास, छा गया सबके दिल पर
बूँदों का घेराव, किया बच्चों ने मिलकर।
बादल की मनुहार से, जाग उठे उद्यान।
पत्ते पत्ते ने किया, जल धारा में स्नान।
जलधारा में स्नान, खिल उठीं कोमल कलियाँ
मधुप कर उठे गान, उड़ीं चहुँ ओर तितलियाँ।
लहराया नम, शीत, पवन पुरवा का आँचल
जाग उठे उद्यान, देख बरसाती बादल।
बदरा कारे जा वहाँ, जहाँ सूखते खेत।
बंजर धरती हो चली, ज्यों मरुथल की रेत।
ज्यों मरुथल की रेत, फसल से सावन रूठा।
वादा कर आषाढ़, न बरसा वो भी झूठा।
कहना मेरा मान, “कल्पना” कहती प्यारे
जहाँ सूखते खेत, चला जा बदरा कारे।