कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १४ / २०४ № 14 of 204 रचना १४ / २०४
६ सितम्बर २०१३ 6 September 2013 ६ सितम्बर २०१३

गाथा कृष्ण की//गज़ल// gaathaa kriishn kee//gazal// गाथा कृष्ण की//गज़ल//

फिर सुनी पावन

पुरा-कालीन गाथा कृष्ण की।

जो सदा है मोक्षदाई, द्वार, महिमा कृष्ण

की।

विष्णु के अवतार

जन्में, पापियों के नाश को

थे चकित भूलोक वासी, देख माया

कृष्ण की।

देवकी-वसुदेव सुत, गोकुल में

खेले औ बढ़े

गूँजती गलियों में थी, प्यारी

मुरलिया कृष्ण की।

जब बने राजा बसाई, एक नगरी द्वारका

और देवी रुक्मिणी, कहलाई भामा

कृष्ण की।

सारथी बन, वीर अर्जुन, के बढ़ाए हौसले

युद्ध के मैदान में

फहरी पताका कृष्ण की।

जो दिये उपदेश उनका, सार कवियों ने

रचा।

ग्रंथ-गीता में निहित

वो, ज्ञानगंगा कृष्ण की।

जन्म-उत्सव साल हर, जन-जन मनाता

देश में

झाँकियों में दृष्ट

होती, रास-लीला कृष्ण की।

मटकियाँ माखन दही की, टाँग हर

चौराहे पर

फोड़ कर, दुहराई जाती, बाल क्रीडा

कृष्ण की।

गाँव-गोकुल, तीर यमुना, सून सब मोहन

बिना

नारियाँ-नर याद करते, प्रीत राधा

कृष्ण की।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

phir sunee paawan

puraa-kaaleen gaathaa kriishn kee

·

jo sadaa hai mokshadaaee, dvaar, mahimaa kriishn

kee

·

wishnu ke awataar

janmen, paapiyon ke naash ko

·

the chakit bhoolok waasee, dekh maayaa

kriishn kee

·

dewakee-wasudew sut, gokul men

khele au bढ़e

·

goonjatee galiyon men thee, pyaaree

muraliyaa kriishn kee

·

jab bane raajaa basaaee, ek nagaree dvaarakaa

·

aur dewee rukminee, kahalaaee bhaamaa

kriishn kee

·

saarathee ban, weer arjun, ke bढ़aae hausale

·

yuddh ke maidaan men

phaharee pataakaa kriishn kee

·

jo diye upadesh unakaa, saar kawiyon ne

rachaa

·

granth-geetaa men nihit

wo, jnaanagangaa kriishn kee

·

janm-utsaw saal har, jan-jan manaataa

desh men

·

jhaankiyon men driisht

hotee, raas-leelaa kriishn kee

·

matakiyaan maakhan dahee kee, taang har

chauraahe par

·

phod kar, duharaaee jaatee, baal kreedaa

kriishn kee

·

gaanv-gokul, teer yamunaa, soon sab mohan

binaa

·

naariyaan-nar yaad karate, preet raadhaa

kriishn kee

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

फिर सुनी पावन

पुरा-कालीन गाथा कृष्ण की।

जो सदा है मोक्षदाई, द्वार, महिमा कृष्ण

की।

विष्णु के अवतार

जन्में, पापियों के नाश को

थे चकित भूलोक वासी, देख माया

कृष्ण की।

देवकी-वसुदेव सुत, गोकुल में

खेले औ बढ़े

गूँजती गलियों में थी, प्यारी

मुरलिया कृष्ण की।

जब बने राजा बसाई, एक नगरी द्वारका

और देवी रुक्मिणी, कहलाई भामा

कृष्ण की।

सारथी बन, वीर अर्जुन, के बढ़ाए हौसले

युद्ध के मैदान में

फहरी पताका कृष्ण की।

जो दिये उपदेश उनका, सार कवियों ने

रचा।

ग्रंथ-गीता में निहित

वो, ज्ञानगंगा कृष्ण की।

जन्म-उत्सव साल हर, जन-जन मनाता

देश में

झाँकियों में दृष्ट

होती, रास-लीला कृष्ण की।

मटकियाँ माखन दही की, टाँग हर

चौराहे पर

फोड़ कर, दुहराई जाती, बाल क्रीडा

कृष्ण की।

गाँव-गोकुल, तीर यमुना, सून सब मोहन

बिना

नारियाँ-नर याद करते, प्रीत राधा

कृष्ण की।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗