कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५७ / २०४ № 157 of 204 रचना १५७ / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी{प्रेम) main gazal kahatee rahoongee{prem) मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी{प्रेम)

गीत मैं रचती रहूँगी, मीत

यदि तुम पास हो तो

मैं गजल कहती रहूँगी

गर सुरों में साथ दो तो

मैं नदी होकर भी प्यासी

आदि से हूँ आज दिन तक

रुख तुम्हारी ओर कर लूँ

तुम जलधि बनकर बहो तो

सच कहे जो आइना वो

आज तक देखा न मैंने

मैं सजन सजती रहूँगी

तुम अगर दर्पण बनो तो

इस जनम में तुमको पाया

धन्य है यह नारी-जीवन

फिर जनम लेती रहूँगी

हर जनम में तुम मिलो तो

नष्ट हो तन, तो ये मन

भटकेगा भव की वाटिका में

बन कली खिलती रहूँगी

तुम भ्रमर बन आ सको तो

प्यार, वादे और कसमें

इंतिहा अब हो चुकी है

साथ जीवन भर रहूँगी

इक घरौंदा तुम बुनो तो

खो भी जाऊँ “कल्पना”

तो ढूँढना इन वादियों में

प्रतिध्वनित होती रहूँगी

तुम अगर आवाज़ दो तो

geet main rachatee rahoongee, meet

yadi tum paas ho to

main gajal kahatee rahoongee

gar suron men saath do to

·

main nadee hokar bhee pyaasee

aadi se hoon aaj din tak

rukh tumhaaree or kar loon

tum jaladhi banakar baho to

·

sach kahe jo aainaa wo

aaj tak dekhaa n mainne

main sajan sajatee rahoongee

tum agar darpan bano to

·

is janam men tumako paayaa

dhany hai yah naaree-jeewan

phir janam letee rahoongee

har janam men tum milo to

·

nasht ho tan, to ye man

bhatakegaa bhaw kee waatikaa men

ban kalee khilatee rahoongee

tum bhramar ban aa sako to

·

pyaar, waade aur kasamen

intihaa ab ho chukee hai

saath jeewan bhar rahoongee

ik gharaundaa tum buno to

·

kho bhee jaaoon “kalpanaa”

to dhoondhanaa in waadiyon men

pratidhvanit hotee rahoongee

tum agar aawaaz do to

गीत मैं रचती रहूँगी, मीत

यदि तुम पास हो तो

मैं गजल कहती रहूँगी

गर सुरों में साथ दो तो

मैं नदी होकर भी प्यासी

आदि से हूँ आज दिन तक

रुख तुम्हारी ओर कर लूँ

तुम जलधि बनकर बहो तो

सच कहे जो आइना वो

आज तक देखा न मैंने

मैं सजन सजती रहूँगी

तुम अगर दर्पण बनो तो

इस जनम में तुमको पाया

धन्य है यह नारी-जीवन

फिर जनम लेती रहूँगी

हर जनम में तुम मिलो तो

नष्ट हो तन, तो ये मन

भटकेगा भव की वाटिका में

बन कली खिलती रहूँगी

तुम भ्रमर बन आ सको तो

प्यार, वादे और कसमें

इंतिहा अब हो चुकी है

साथ जीवन भर रहूँगी

इक घरौंदा तुम बुनो तो

खो भी जाऊँ “कल्पना”

तो ढूँढना इन वादियों में

प्रतिध्वनित होती रहूँगी

तुम अगर आवाज़ दो तो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗