कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५८ / २०४ № 158 of 204 रचना १५८ / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो{प्रेम) meraa pyaar mujhase judaa n ho{prem) मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो{प्रेम)

मेरी एक छोटी सी भूल की

है ये इल्तिज़ा कि सज़ा न हो।

जो सज़ा भी हो तो मेरे खुदा

मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो।

बिना उसके फीके हैं राग सब

न लुभाती कोई भी रागिनी

है अधूरा सुर मेरे गीत का

जहाँ साथ उसका मिला न हो।

वो नहीं अगर मेरे पास तो

कटे तारे गिन मेरी हर निशा

कोई पल गुज़रता नहीं कि जब

उसे याद मैंने किया न हो।

मैं हूँ सोचती बनूँ मानिनी

वो मनाए मुझको बस एक बार

है ये डर मगर कि मेरी तरह

कहीं वो भी ज़िद पे अड़ा न हो।

नहीं गम मुझे मेरे मन को वो

क्यों न आज तक है समझ सका

मेरा मन तो है यही चाहता

कभी मुझसे उसको गिला न हो।

उसे ढूँढते ढली साँझ ये

तो भी आस की है किरण अभी

इन अँधेरों में मुझे थामने

किसी ओट में वो छिपा न हो।

है तमन्ना बस यही “कल्पना”

वो नज़र में हो जियूँ या मरूँ

नहीं मुक्त होगी ये रूह भी

जो उसी के हाथों विदा न हो।

meree ek chotee see bhool kee

hai ye iltizaa ki sazaa n ho

jo sazaa bhee ho to mere khudaa

meraa pyaar mujhase judaa n ho

·

binaa usake pheeke hain raag sab

n lubhaatee koee bhee raaginee

hai adhooraa sur mere geet kaa

jahaan saath usakaa milaa n ho

·

wo naheen agar mere paas to

kate taare gin meree har nishaa

koee pal guzarataa naheen ki jab

use yaad mainne kiyaa n ho

·

main hoon sochatee banoon maaninee

wo manaae mujhako bas ek baar

hai ye dar magar ki meree tarah

kaheen wo bhee zid pe adaa n ho

·

naheen gam mujhe mere man ko wo

kyon n aaj tak hai samajh sakaa

meraa man to hai yahee chaahataa

kabhee mujhase usako gilaa n ho

·

use dhoondhate dhalee saanjh ye

to bhee aas kee hai kiran abhee

in andheron men mujhe thaamane

kisee ot men wo chipaa n ho

·

hai tamannaa bas yahee “kalpanaa”

wo nazar men ho jiyoon yaa maroon

naheen mukt hogee ye rooh bhee

jo usee ke haathon widaa n ho

मेरी एक छोटी सी भूल की

है ये इल्तिज़ा कि सज़ा न हो।

जो सज़ा भी हो तो मेरे खुदा

मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो।

बिना उसके फीके हैं राग सब

न लुभाती कोई भी रागिनी

है अधूरा सुर मेरे गीत का

जहाँ साथ उसका मिला न हो।

वो नहीं अगर मेरे पास तो

कटे तारे गिन मेरी हर निशा

कोई पल गुज़रता नहीं कि जब

उसे याद मैंने किया न हो।

मैं हूँ सोचती बनूँ मानिनी

वो मनाए मुझको बस एक बार

है ये डर मगर कि मेरी तरह

कहीं वो भी ज़िद पे अड़ा न हो।

नहीं गम मुझे मेरे मन को वो

क्यों न आज तक है समझ सका

मेरा मन तो है यही चाहता

कभी मुझसे उसको गिला न हो।

उसे ढूँढते ढली साँझ ये

तो भी आस की है किरण अभी

इन अँधेरों में मुझे थामने

किसी ओट में वो छिपा न हो।

है तमन्ना बस यही “कल्पना”

वो नज़र में हो जियूँ या मरूँ

नहीं मुक्त होगी ये रूह भी

जो उसी के हाथों विदा न हो।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗