नज़र-नज़र में जो{प्रेम) nazar-nazar men jo{prem) नज़र-नज़र में जो{प्रेम)
नज़र-नज़र में जो हो जाए
प्यार क्या कहिए।
बिना बसंत के छाए
बहार क्या कहिए।
सपन सुहाने चले आते
बंद पलकों में
पलक झपकते ही होते
करार क्या कहिए।
धड़कते दिल हैं धुँधलकों
में साँझ होते ही
चमकते नैनों में जुगनू
हज़ार क्या कहिए।
घनेरी घाम में हैं दीखते
घने बादल
अमा के चाँद से झरता
उजार क्या कहिए।
गरम हवा से है आती
सुगंध फूलों की
भिगोता जेठ भी बनकर
फुहार क्या कहिए।
कदम पहुँचते वहीं जिस
जगह जुड़े दो दिल
मिलन की चाह में चल
बार-बार क्या कहिए।
ये “कल्पना” है अगन
प्यार की भला कैसी
हो दिन या रात न जाता
ख़ुमार, क्या कहिए।
nazar-nazar men jo ho jaae
pyaar kyaa kahie
binaa basant ke chaae
bahaar kyaa kahie
sapan suhaane chale aate
band palakon men
palak jhapakate hee hote
karaar kyaa kahie
dhadakate dil hain dhundhalakon
men saanjh hote hee
chamakate nainon men juganoo
hazaar kyaa kahie
ghaneree ghaam men hain deekhate
ghane baadal
amaa ke chaand se jharataa
ujaar kyaa kahie
garam hawaa se hai aatee
sugandh phoolon kee
bhigotaa jeth bhee banakar
phuhaar kyaa kahie
kadam pahunchate waheen jis
jagah jude do dil
milan kee chaah men chal
baar-baar kyaa kahie
ye “kalpanaa” hai agan
pyaar kee bhalaa kaisee
ho din yaa raat n jaataa
kumaar, kyaa kahie
नज़र-नज़र में जो हो जाए
प्यार क्या कहिए।
बिना बसंत के छाए
बहार क्या कहिए।
सपन सुहाने चले आते
बंद पलकों में
पलक झपकते ही होते
करार क्या कहिए।
धड़कते दिल हैं धुँधलकों
में साँझ होते ही
चमकते नैनों में जुगनू
हज़ार क्या कहिए।
घनेरी घाम में हैं दीखते
घने बादल
अमा के चाँद से झरता
उजार क्या कहिए।
गरम हवा से है आती
सुगंध फूलों की
भिगोता जेठ भी बनकर
फुहार क्या कहिए।
कदम पहुँचते वहीं जिस
जगह जुड़े दो दिल
मिलन की चाह में चल
बार-बार क्या कहिए।
ये “कल्पना” है अगन
प्यार की भला कैसी
हो दिन या रात न जाता
ख़ुमार, क्या कहिए।