कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५९ / २०४ № 159 of 204 रचना १५९ / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

नज़र-नज़र में जो{प्रेम) nazar-nazar men jo{prem) नज़र-नज़र में जो{प्रेम)

नज़र-नज़र में जो हो जाए

प्यार क्या कहिए।

बिना बसंत के छाए

बहार क्या कहिए।

सपन सुहाने चले आते

बंद पलकों में

पलक झपकते ही होते

करार क्या कहिए।

धड़कते दिल हैं धुँधलकों

में साँझ होते ही

चमकते नैनों में जुगनू

हज़ार क्या कहिए।

घनेरी घाम में हैं दीखते

घने बादल

अमा के चाँद से झरता

उजार क्या कहिए।

गरम हवा से है आती

सुगंध  फूलों की

भिगोता जेठ भी बनकर

फुहार क्या कहिए।

कदम पहुँचते वहीं जिस

जगह  जुड़े दो दिल

मिलन की चाह में चल

बार-बार क्या कहिए।

ये “कल्पना” है अगन

प्यार की भला कैसी

हो दिन या रात न जाता

ख़ुमार, क्या कहिए।

nazar-nazar men jo ho jaae

pyaar kyaa kahie

binaa basant ke chaae

bahaar kyaa kahie

·

sapan suhaane chale aate

band palakon men

palak jhapakate hee hote

karaar kyaa kahie

·

dhadakate dil hain dhundhalakon

men saanjh hote hee

chamakate nainon men juganoo

hazaar kyaa kahie

·

ghaneree ghaam men hain deekhate

ghane baadal

amaa ke chaand se jharataa

ujaar kyaa kahie

·

garam hawaa se hai aatee

sugandh phoolon kee

bhigotaa jeth bhee banakar

phuhaar kyaa kahie

·

kadam pahunchate waheen jis

jagah jude do dil

milan kee chaah men chal

baar-baar kyaa kahie

·

ye “kalpanaa” hai agan

pyaar kee bhalaa kaisee

ho din yaa raat n jaataa

kumaar, kyaa kahie

नज़र-नज़र में जो हो जाए

प्यार क्या कहिए।

बिना बसंत के छाए

बहार क्या कहिए।

सपन सुहाने चले आते

बंद पलकों में

पलक झपकते ही होते

करार क्या कहिए।

धड़कते दिल हैं धुँधलकों

में साँझ होते ही

चमकते नैनों में जुगनू

हज़ार क्या कहिए।

घनेरी घाम में हैं दीखते

घने बादल

अमा के चाँद से झरता

उजार क्या कहिए।

गरम हवा से है आती

सुगंध  फूलों की

भिगोता जेठ भी बनकर

फुहार क्या कहिए।

कदम पहुँचते वहीं जिस

जगह  जुड़े दो दिल

मिलन की चाह में चल

बार-बार क्या कहिए।

ये “कल्पना” है अगन

प्यार की भला कैसी

हो दिन या रात न जाता

ख़ुमार, क्या कहिए।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗