कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६० / २०५ № 160 of 205 रचना १६० / २०५
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

नज़र-नज़र में जो{प्रेम) nazar-nazar men jo{prem) नज़र-नज़र में जो{प्रेम)

नज़र-नज़र में जो हो जाए

प्यार क्या कहिए।

बिना बसंत के छाए

बहार क्या कहिए।

॥

सपन सुहाने चले आते

बंद पलकों में

पलक झपकते ही होते

करार क्या कहिए।

॥

धड़कते दिल हैं धुँधलकों

में साँझ होते ही

चमकते नैनों में जुगनू

हज़ार क्या कहिए।

॥

घनेरी घाम में हैं दीखते

घने बादल

अमा के चाँद से झरता

उजार क्या कहिए।

॥

गरम हवा से है आती

सुगंध  फूलों की

भिगोता जेठ भी बनकर

फुहार क्या कहिए।

॥

कदम पहुँचते वहीं जिस

जगह  जुड़े दो दिल

मिलन की चाह में चल

बार-बार क्या कहिए।

॥

ये “कल्पना” है अगन

प्यार की भला कैसी

हो दिन या रात न जाता

ख़ुमार, क्या कहिए।

nazar-nazar men jo ho jaae

pyaar kyaa kahie

binaa basant ke chaae

bahaar kyaa kahie

·

sapan suhaane chale aate

band palakon men

palak jhapakate hee hote

karaar kyaa kahie

·

dhadakate dil hain dhundhalakon

men saanjh hote hee

chamakate nainon men juganoo

hazaar kyaa kahie

·

ghaneree ghaam men hain deekhate

ghane baadal

amaa ke chaand se jharataa

ujaar kyaa kahie

·

garam hawaa se hai aatee

sugandh phoolon kee

bhigotaa jeth bhee banakar

phuhaar kyaa kahie

·

kadam pahunchate waheen jis

jagah jude do dil

milan kee chaah men chal

baar-baar kyaa kahie

·

ye “kalpanaa” hai agan

pyaar kee bhalaa kaisee

ho din yaa raat n jaataa

kumaar, kyaa kahie

नज़र-नज़र में जो हो जाए

प्यार क्या कहिए।

बिना बसंत के छाए

बहार क्या कहिए।

॥

सपन सुहाने चले आते

बंद पलकों में

पलक झपकते ही होते

करार क्या कहिए।

॥

धड़कते दिल हैं धुँधलकों

में साँझ होते ही

चमकते नैनों में जुगनू

हज़ार क्या कहिए।

॥

घनेरी घाम में हैं दीखते

घने बादल

अमा के चाँद से झरता

उजार क्या कहिए।

॥

गरम हवा से है आती

सुगंध  फूलों की

भिगोता जेठ भी बनकर

फुहार क्या कहिए।

॥

कदम पहुँचते वहीं जिस

जगह  जुड़े दो दिल

मिलन की चाह में चल

बार-बार क्या कहिए।

॥

ये “कल्पना” है अगन

प्यार की भला कैसी

हो दिन या रात न जाता

ख़ुमार, क्या कहिए।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗