कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६० / २०४ № 160 of 204 रचना १६० / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम) tumase nazaren mileen{prem) तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम)

तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ।

और मौसम अचानक, सुहाना हुआ।

साथ जीने के, मरने के, वादे हुए

एक छोटा सुखद, आशियाना हुआ।

वक्त चलता रहा, दिन गुजरते रहे

प्यार का वो नशा कुछ, पुराना हुआ।

रंग बदले तुम्हारे, हुई दंग मैं

दूर रहने का हर दिन, बहाना हुआ।

तुम तो ऐसे न थे, बेवफा किसलिए

मेरे दिल से अलग भी, ठिकाना हुआ।

खिलखिलाते वे दिन, हँस-हँसाते वे दिन

तुम तो भूले न मुझसे, भुलाना हुआ।

लौट आओ तुम्हें, ‘कल्पना’ है कसम

मान लूँगी कि जो भी, हुआ ना हुआ।

tumase nazaren mileen, man milaanaa huaa

aur mausam achaanak, suhaanaa huaa

·

saath jeene ke, marane ke, waade hue

ek chotaa sukhad, aashiyaanaa huaa

·

wakt chalataa rahaa, din gujarate rahe

pyaar kaa wo nashaa kuch, puraanaa huaa

·

rang badale tumhaare, huee dang main

door rahane kaa har din, bahaanaa huaa

·

tum to aise n the, bewaphaa kisalie

mere dil se alag bhee, thikaanaa huaa

·

khilakhilaate we din, hans-hansaate we din

tum to bhoole n mujhase, bhulaanaa huaa

·

laut aao tumhen, ‘kalpanaa’ hai kasam

maan loongee ki jo bhee, huaa naa huaa

तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ।

और मौसम अचानक, सुहाना हुआ।

साथ जीने के, मरने के, वादे हुए

एक छोटा सुखद, आशियाना हुआ।

वक्त चलता रहा, दिन गुजरते रहे

प्यार का वो नशा कुछ, पुराना हुआ।

रंग बदले तुम्हारे, हुई दंग मैं

दूर रहने का हर दिन, बहाना हुआ।

तुम तो ऐसे न थे, बेवफा किसलिए

मेरे दिल से अलग भी, ठिकाना हुआ।

खिलखिलाते वे दिन, हँस-हँसाते वे दिन

तुम तो भूले न मुझसे, भुलाना हुआ।

लौट आओ तुम्हें, ‘कल्पना’ है कसम

मान लूँगी कि जो भी, हुआ ना हुआ।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗