कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६१ / २०५ № 161 of 205 रचना १६१ / २०५
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम) tumase nazaren mileen{prem) तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम)

तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ।

और मौसम अचानक, सुहाना हुआ।

॥

साथ जीने के, मरने के, वादे हुए

एक छोटा सुखद, आशियाना हुआ।

॥

वक्त चलता रहा, दिन गुजरते रहे

प्यार का वो नशा कुछ, पुराना हुआ।

॥

रंग बदले तुम्हारे, हुई दंग मैं

दूर रहने का हर दिन, बहाना हुआ।

॥

तुम तो ऐसे न थे, बेवफा किसलिए

मेरे दिल से अलग भी, ठिकाना हुआ।

॥

खिलखिलाते वे दिन, हँस-हँसाते वे दिन

तुम तो भूले न मुझसे, भुलाना हुआ।

॥

लौट आओ तुम्हें, ‘कल्पना’ है कसम

मान लूँगी कि जो भी, हुआ ना हुआ।

tumase nazaren mileen, man milaanaa huaa

aur mausam achaanak, suhaanaa huaa

·

saath jeene ke, marane ke, waade hue

ek chotaa sukhad, aashiyaanaa huaa

·

wakt chalataa rahaa, din gujarate rahe

pyaar kaa wo nashaa kuch, puraanaa huaa

·

rang badale tumhaare, huee dang main

door rahane kaa har din, bahaanaa huaa

·

tum to aise n the, bewaphaa kisalie

mere dil se alag bhee, thikaanaa huaa

·

khilakhilaate we din, hans-hansaate we din

tum to bhoole n mujhase, bhulaanaa huaa

·

laut aao tumhen, ‘kalpanaa’ hai kasam

maan loongee ki jo bhee, huaa naa huaa

तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ।

और मौसम अचानक, सुहाना हुआ।

॥

साथ जीने के, मरने के, वादे हुए

एक छोटा सुखद, आशियाना हुआ।

॥

वक्त चलता रहा, दिन गुजरते रहे

प्यार का वो नशा कुछ, पुराना हुआ।

॥

रंग बदले तुम्हारे, हुई दंग मैं

दूर रहने का हर दिन, बहाना हुआ।

॥

तुम तो ऐसे न थे, बेवफा किसलिए

मेरे दिल से अलग भी, ठिकाना हुआ।

॥

खिलखिलाते वे दिन, हँस-हँसाते वे दिन

तुम तो भूले न मुझसे, भुलाना हुआ।

॥

लौट आओ तुम्हें, ‘कल्पना’ है कसम

मान लूँगी कि जो भी, हुआ ना हुआ।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗