कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४२ / २०४ № 42 of 204 रचना ४२ / २०४
२९ अप्रैल २०१४ 29 April 2014 २९ अप्रैल २०१४

कल से मिला वो आज गँवाना तो है नहीं kal se milaa wo aaj ganvaanaa to hai naheen कल से मिला वो आज गँवाना तो है नहीं

पुरखों का नेक नाम, डुबाना

तो है नहीं।

कल से मिला वो आज,

गँवाना तो है नहीं।

दागी को देके वोट, जिताना

तो है नहीं।

फिर से फिरंगी फौज, बुलाना

तो है नहीं।

अंग्रेज़ियत को आज,

करें किसलिए सलाम,

हिन्दी का हमको मान,

घटाना तो है नहीं।

अच्छा है कोई ठौर,

शहर ने नहीं दिया,

शहरों में जाके गाँव,

बसाना तो है नहीं।

है भूख को ये आस,

कि दो रोटियाँ मिलें,

रोटी का कोई पेड़,

उगाना तो है नहीं।

मिल जाएगी ज़रूर,

सही राह एक दिन,

आगे बढ़ाके पाँव,

हटाना तो है नहीं।

सच्चाइयों के शूल,

किसी को चुभा करें,

“अपना भी कोई खास, निशाना तो है नहीं”

है चाह “कल्पना” कि रहे शाद ये वतन,

बर्बाद करके जश्न,

मनाना तो है नहीं।

--------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

purakhon kaa nek naam, dubaanaa

to hai naheen

·

kal se milaa wo aaj,

ganvaanaa to hai naheen

·

daagee ko deke wot, jitaanaa

to hai naheen

·

phir se phirangee phauj, bulaanaa

to hai naheen

·

angreziyat ko aaj,

karen kisalie salaam,

·

hindee kaa hamako maan,

ghataanaa to hai naheen

·

achchaa hai koee thaur,

shahar ne naheen diyaa,

·

shaharon men jaake gaanv,

basaanaa to hai naheen

·

hai bhookh ko ye aas,

ki do rotiyaan milen,

·

rotee kaa koee ped,

ugaanaa to hai naheen

·

mil jaaegee zaroor,

sahee raah ek din,

·

aage bढ़aake paanv,

hataanaa to hai naheen

·

sachchaaiyon ke shool,

kisee ko chubhaa karen,

·

“apanaa bhee koee khaas, nishaanaa to hai naheen”

·

hai chaah “kalpanaa” ki rahe shaad ye watan,

·

barbaad karake jashn,

manaanaa to hai naheen

·

--------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

पुरखों का नेक नाम, डुबाना

तो है नहीं।

कल से मिला वो आज,

गँवाना तो है नहीं।

दागी को देके वोट, जिताना

तो है नहीं।

फिर से फिरंगी फौज, बुलाना

तो है नहीं।

अंग्रेज़ियत को आज,

करें किसलिए सलाम,

हिन्दी का हमको मान,

घटाना तो है नहीं।

अच्छा है कोई ठौर,

शहर ने नहीं दिया,

शहरों में जाके गाँव,

बसाना तो है नहीं।

है भूख को ये आस,

कि दो रोटियाँ मिलें,

रोटी का कोई पेड़,

उगाना तो है नहीं।

मिल जाएगी ज़रूर,

सही राह एक दिन,

आगे बढ़ाके पाँव,

हटाना तो है नहीं।

सच्चाइयों के शूल,

किसी को चुभा करें,

“अपना भी कोई खास, निशाना तो है नहीं”

है चाह “कल्पना” कि रहे शाद ये वतन,

बर्बाद करके जश्न,

मनाना तो है नहीं।

--------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗