कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६९ / १६४ № 69 of 164 रचना ६९ / १६४
२३ अप्रैल २०१४ 23 April 2014 २३ अप्रैल २०१४

गाँवों के पंछी उदास हैं gaanvon ke panchee udaas hain गाँवों के पंछी उदास हैं

गाँवों के पंछी उदास हैं

॥

देख-देख सन्नाटा भारी।

॥

जब से नई हवा ने अपना

॥

रुख मोड़ा शहरों की ओर।

॥

बंद किवाड़ों से टकराकर

॥

वापस जाती है हर भोर।

॥

नहीं बुलाते चुग्गा लेकर

॥

अब उनको मुंडेर, अटारी।

॥

हर आँगन के हरे पेड़ पर

॥

पतझड़ बैठा डेरा डाल।

॥

भीत हो रहा तुलसी चौरा

॥

देख सन्निकट अपना काल।

॥

बदल रहा है अब तो हर घर

॥

वृद्धाश्रम में बारी-बारी।

gaanvon ke panchee udaas hain

·

dekh-dekh sannaataa bhaaree

·

jab se naee hawaa ne apanaa

·

rukh modaa shaharon kee or

·

band kiwaadon se takaraakar

·

waapas jaatee hai har bhor

·

naheen bulaate chuggaa lekar

·

ab unako munder, ataaree

·

har aangan ke hare ped par

·

patajhad baithaa deraa daal

·

bheet ho rahaa tulasee chauraa

·

dekh sannikat apanaa kaal

·

badal rahaa hai ab to har ghar

·

wriiddhaashram men baaree-baaree

गाँवों के पंछी उदास हैं

॥

देख-देख सन्नाटा भारी।

॥

जब से नई हवा ने अपना

॥

रुख मोड़ा शहरों की ओर।

॥

बंद किवाड़ों से टकराकर

॥

वापस जाती है हर भोर।

॥

नहीं बुलाते चुग्गा लेकर

॥

अब उनको मुंडेर, अटारी।

॥

हर आँगन के हरे पेड़ पर

॥

पतझड़ बैठा डेरा डाल।

॥

भीत हो रहा तुलसी चौरा

॥

देख सन्निकट अपना काल।

॥

बदल रहा है अब तो हर घर

॥

वृद्धाश्रम में बारी-बारी।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗