कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५७ / १६४ № 157 of 164 रचना १५७ / १६४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

विजय फलक पर wijay phalak par विजय फलक पर

वर्तमान

पर करके अपने

॥

अहम

दस्तखत

॥

नए

साल ने बीते के

॥

दुख

को दफनाया।

॥

जिन

काँटों को व्यर्थ

॥

समझते रहे

मुकुटधर

॥

और

काट कर गए

॥

फेंकते नित

घूरे पर

॥

आज

उन्होंने एक नया

॥

उद्यान

बसाया।

॥

जिनसे

छिपता था सूरज

॥

हर

भोर चिढ़ाकर

॥

अँधियारों

की एक नई

॥

दीवार

बनाकर

॥

उन

अबलों ने अपने

॥

बल पर दीप

जलाया।

॥

कर्म-कलश

ने हसरत से

॥

खेतों

को सींचा

॥

नव-संकल्प, हथेली ने

wartamaan

par karake apane

·

aham

dastakhat

·

nae

saal ne beete ke

·

dukh

ko daphanaayaa

·

jin

kaanton ko wyarth

·

samajhate rahe

mukutadhar

·

aur

kaat kar gae

·

phenkate nit

ghoore par

·

aaj

unhonne ek nayaa

·

udyaan

basaayaa

·

jinase

chipataa thaa sooraj

·

har

bhor chiढ़aakar

·

andhiyaaron

kee ek naee

·

deewaar

banaakar

·

un

abalon ne apane

·

bal par deep

jalaayaa

·

karm-kalash

ne hasarat se

·

kheton

ko seenchaa

·

naw-sankalp, hathelee ne

वर्तमान

पर करके अपने

॥

अहम

दस्तखत

॥

नए

साल ने बीते के

॥

दुख

को दफनाया।

॥

जिन

काँटों को व्यर्थ

॥

समझते रहे

मुकुटधर

॥

और

काट कर गए

॥

फेंकते नित

घूरे पर

॥

आज

उन्होंने एक नया

॥

उद्यान

बसाया।

॥

जिनसे

छिपता था सूरज

॥

हर

भोर चिढ़ाकर

॥

अँधियारों

की एक नई

॥

दीवार

बनाकर

॥

उन

अबलों ने अपने

॥

बल पर दीप

जलाया।

॥

कर्म-कलश

ने हसरत से

॥

खेतों

को सींचा

॥

नव-संकल्प, हथेली ने

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗