विजय फलक पर wijay phalak par विजय फलक पर
वर्तमान
पर करके अपने
अहम
दस्तखत
नए
साल ने बीते के
दुख
को दफनाया।
जिन
काँटों को व्यर्थ
समझते रहे
मुकुटधर
और
काट कर गए
फेंकते नित
घूरे पर
आज
उन्होंने एक नया
उद्यान
बसाया।
जिनसे
छिपता था सूरज
हर
भोर चिढ़ाकर
अँधियारों
की एक नई
दीवार
बनाकर
उन
अबलों ने अपने
बल पर दीप
जलाया।
कर्म-कलश
ने हसरत से
खेतों
को सींचा
नव-संकल्प, हथेली ने
wartamaan
par karake apane
aham
dastakhat
nae
saal ne beete ke
dukh
ko daphanaayaa
jin
kaanton ko wyarth
samajhate rahe
mukutadhar
aur
kaat kar gae
phenkate nit
ghoore par
aaj
unhonne ek nayaa
udyaan
basaayaa
jinase
chipataa thaa sooraj
har
bhor chiढ़aakar
andhiyaaron
kee ek naee
deewaar
banaakar
un
abalon ne apane
bal par deep
jalaayaa
karm-kalash
ne hasarat se
kheton
ko seenchaa
naw-sankalp, hathelee ne
वर्तमान
पर करके अपने
अहम
दस्तखत
नए
साल ने बीते के
दुख
को दफनाया।
जिन
काँटों को व्यर्थ
समझते रहे
मुकुटधर
और
काट कर गए
फेंकते नित
घूरे पर
आज
उन्होंने एक नया
उद्यान
बसाया।
जिनसे
छिपता था सूरज
हर
भोर चिढ़ाकर
अँधियारों
की एक नई
दीवार
बनाकर
उन
अबलों ने अपने
बल पर दीप
जलाया।
कर्म-कलश
ने हसरत से
खेतों
को सींचा
नव-संकल्प, हथेली ने