कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५६ / १६३ № 156 of 163 रचना १५६ / १६३
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

विजय फलक पर wijay phalak par विजय फलक पर

वर्तमान

पर करके अपने

अहम

दस्तखत

नए

साल ने बीते के

दुख

को दफनाया।

जिन

काँटों को व्यर्थ

समझते रहे

मुकुटधर

और

काट कर गए

फेंकते नित

घूरे पर

आज

उन्होंने एक नया

उद्यान

बसाया।

जिनसे

छिपता था सूरज

हर

भोर चिढ़ाकर

अँधियारों

की एक नई

दीवार

बनाकर

उन

अबलों ने अपने

बल पर दीप

जलाया।

कर्म-कलश

ने हसरत से

खेतों

को सींचा

नव-संकल्प, हथेली ने

wartamaan

par karake apane

·

aham

dastakhat

·

nae

saal ne beete ke

·

dukh

ko daphanaayaa

·

jin

kaanton ko wyarth

·

samajhate rahe

mukutadhar

·

aur

kaat kar gae

·

phenkate nit

ghoore par

·

aaj

unhonne ek nayaa

·

udyaan

basaayaa

·

jinase

chipataa thaa sooraj

·

har

bhor chiढ़aakar

·

andhiyaaron

kee ek naee

·

deewaar

banaakar

·

un

abalon ne apane

·

bal par deep

jalaayaa

·

karm-kalash

ne hasarat se

·

kheton

ko seenchaa

·

naw-sankalp, hathelee ne

वर्तमान

पर करके अपने

अहम

दस्तखत

नए

साल ने बीते के

दुख

को दफनाया।

जिन

काँटों को व्यर्थ

समझते रहे

मुकुटधर

और

काट कर गए

फेंकते नित

घूरे पर

आज

उन्होंने एक नया

उद्यान

बसाया।

जिनसे

छिपता था सूरज

हर

भोर चिढ़ाकर

अँधियारों

की एक नई

दीवार

बनाकर

उन

अबलों ने अपने

बल पर दीप

जलाया।

कर्म-कलश

ने हसरत से

खेतों

को सींचा

नव-संकल्प, हथेली ने

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗