कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ८९ / ११४ № 89 of 114 रचना ८९ / ११४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

जवाब दीजिये- कहानी jawaab deejiye- kahaanee जवाब दीजिये- कहानी

मई माह की जानलेवा गर्मी की प्रभात वेला में मुरुड़ बीच (महाराष्ट्र) पर स्थित होटल “डिवाइन होम स्टे” के अंदरूनी विशाल द्वार पर खड़ा आशीष अपने क़दमों में लोटते अनंत सागर की अथाह गहराई में खोया हुआ था कि अचानक उसकी मौन साधना को भंग करती हुई क़दमों की आहट उसके निकट ही आकर ठहर गई. पलटकर देखा तो एक १७- १८ वर्षीय प्यारी सी किशोर वय की बालिका मोबाइल हाथ में लिए उसी को निहार रही थी.आशीष के पलटते ही उसने अपना

maee maah kee jaanalewaa garmee kee prabhaat welaa men murud beech (mahaaraashtr) par sthit hotal “diwaain hom ste” ke andaroonee wishaal dvaar par khadaa aasheesh apane qadamon men lotate anant saagar kee athaah gaharaaee men khoyaa huaa thaa ki achaanak usakee maun saadhanaa ko bhang karatee huee qadamon kee aahat usake nikat hee aakar thahar gaee palatakar dekhaa to ek 17- 18 warsheey pyaaree see kishor way kee baalikaa mobaail haath men lie usee ko nihaar rahee theeaasheesh ke palatate hee usane apanaa

मई माह की जानलेवा गर्मी की प्रभात वेला में मुरुड़ बीच (महाराष्ट्र) पर स्थित होटल “डिवाइन होम स्टे” के अंदरूनी विशाल द्वार पर खड़ा आशीष अपने क़दमों में लोटते अनंत सागर की अथाह गहराई में खोया हुआ था कि अचानक उसकी मौन साधना को भंग करती हुई क़दमों की आहट उसके निकट ही आकर ठहर गई. पलटकर देखा तो एक १७- १८ वर्षीय प्यारी सी किशोर वय की बालिका मोबाइल हाथ में लिए उसी को निहार रही थी.आशीष के पलटते ही उसने अपना

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗