कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५६ / १६४ № 156 of 164 रचना १५६ / १६४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

साल तो आया नवल saal to aayaa nawal साल तो आया नवल

साल

तो आया नवल शुभकार

॥

उसका

सार जानें।

॥

कुछ

नया करना हमें ही

॥

कार्य

होगा इस

॥

बहाने।

॥

छोड़

कल के छल, छिछोरापन

॥

ज़रा

गांभीर्य ओढ़ें।

॥

मात

दे दुर्मिल भँवर को, नाव

॥

तट

की ओर मोड़ें।

॥

हो

जमी काई जहाँ पर

॥

पग

नहीं उस पथ

॥

बढ़ाने।

॥

माफ

सारे पाप होंगे, जाप

॥

यदि

होंगे हया के।

॥

प्रार्थना, चिंतन, मनन ही, द्वार

॥

खोलेंगे

दया के।

॥

भावना

भरपूर हो तो

॥

शंख

गूँजें या

saal

to aayaa nawal shubhakaar

·

usakaa

saar jaanen

·

kuch

nayaa karanaa hamen hee

·

kaary

hogaa is

·

bahaane

·

chod

kal ke chal, chichoraapan

·

zaraa

gaanbheery oढ़en

·

maat

de durmil bhanvar ko, naaw

·

tat

kee or moden

·

ho

jamee kaaee jahaan par

·

pag

naheen us path

·

bढ़aane

·

maaph

saare paap honge, jaap

·

yadi

honge hayaa ke

·

praarthanaa, chintan, manan hee, dvaar

·

kholenge

dayaa ke

·

bhaawanaa

bharapoor ho to

·

shankh

goonjen yaa

साल

तो आया नवल शुभकार

॥

उसका

सार जानें।

॥

कुछ

नया करना हमें ही

॥

कार्य

होगा इस

॥

बहाने।

॥

छोड़

कल के छल, छिछोरापन

॥

ज़रा

गांभीर्य ओढ़ें।

॥

मात

दे दुर्मिल भँवर को, नाव

॥

तट

की ओर मोड़ें।

॥

हो

जमी काई जहाँ पर

॥

पग

नहीं उस पथ

॥

बढ़ाने।

॥

माफ

सारे पाप होंगे, जाप

॥

यदि

होंगे हया के।

॥

प्रार्थना, चिंतन, मनन ही, द्वार

॥

खोलेंगे

दया के।

॥

भावना

भरपूर हो तो

॥

शंख

गूँजें या

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗