कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५४ / १६३ № 154 of 163 रचना १५४ / १६३
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

नया कैलेण्डर nayaa kailendar नया कैलेण्डर

सुगम-काल

की अगम-आस में

मैंने

भी फिर उसी कील पर

नया

कैलेंडर

टाँग

दिया।

अच्छे

दिन कर पार भँवर को

तिर

जाएँ यह हो सकता है।

वही

चखेगा फल मीठे जो

श्रम

बीजों को बो सकता है।

तट

पाने की चरम चाह में

मन

नौका ने पाल तानकर

भरे

जलधि को

लाँघ

लिया।

दीप

देखकर तूफां अपना

रुख

बदले, यह नहीं असंभव।

घोर

तिमिर से ही तो होता

बलशाली

किरणों का उद्भव!

कर्म-ज्योति

का

sugam-kaal

kee agam-aas men

·

mainne

bhee phir usee keel par

·

nayaa

kailendar

·

taang

diyaa

·

achche

din kar paar bhanvar ko

·

tir

jaaen yah ho sakataa hai

·

wahee

chakhegaa phal meethe jo

·

shram

beejon ko bo sakataa hai

·

tat

paane kee charam chaah men

·

man

naukaa ne paal taanakar

·

bhare

jaladhi ko

·

laangh

liyaa

·

deep

dekhakar toophaan apanaa

·

rukh

badale, yah naheen asanbhaw

·

ghor

timir se hee to hotaa

·

balashaalee

kiranon kaa udbhaw!

·

karm-jyoti

kaa

सुगम-काल

की अगम-आस में

मैंने

भी फिर उसी कील पर

नया

कैलेंडर

टाँग

दिया।

अच्छे

दिन कर पार भँवर को

तिर

जाएँ यह हो सकता है।

वही

चखेगा फल मीठे जो

श्रम

बीजों को बो सकता है।

तट

पाने की चरम चाह में

मन

नौका ने पाल तानकर

भरे

जलधि को

लाँघ

लिया।

दीप

देखकर तूफां अपना

रुख

बदले, यह नहीं असंभव।

घोर

तिमिर से ही तो होता

बलशाली

किरणों का उद्भव!

कर्म-ज्योति

का

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗