कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५५ / १६४ № 155 of 164 रचना १५५ / १६४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

नया कैलेण्डर nayaa kailendar नया कैलेण्डर

सुगम-काल

की अगम-आस में

॥

मैंने

भी फिर उसी कील पर

॥

नया

कैलेंडर

॥

टाँग

दिया।

॥

अच्छे

दिन कर पार भँवर को

॥

तिर

जाएँ यह हो सकता है।

॥

वही

चखेगा फल मीठे जो

॥

श्रम

बीजों को बो सकता है।

॥

तट

पाने की चरम चाह में

॥

मन

नौका ने पाल तानकर

॥

भरे

जलधि को

॥

लाँघ

लिया।

॥

दीप

देखकर तूफां अपना

॥

रुख

बदले, यह नहीं असंभव।

॥

घोर

तिमिर से ही तो होता

॥

बलशाली

किरणों का उद्भव!

॥

कर्म-ज्योति

का

sugam-kaal

kee agam-aas men

·

mainne

bhee phir usee keel par

·

nayaa

kailendar

·

taang

diyaa

·

achche

din kar paar bhanvar ko

·

tir

jaaen yah ho sakataa hai

·

wahee

chakhegaa phal meethe jo

·

shram

beejon ko bo sakataa hai

·

tat

paane kee charam chaah men

·

man

naukaa ne paal taanakar

·

bhare

jaladhi ko

·

laangh

liyaa

·

deep

dekhakar toophaan apanaa

·

rukh

badale, yah naheen asanbhaw

·

ghor

timir se hee to hotaa

·

balashaalee

kiranon kaa udbhaw!

·

karm-jyoti

kaa

सुगम-काल

की अगम-आस में

॥

मैंने

भी फिर उसी कील पर

॥

नया

कैलेंडर

॥

टाँग

दिया।

॥

अच्छे

दिन कर पार भँवर को

॥

तिर

जाएँ यह हो सकता है।

॥

वही

चखेगा फल मीठे जो

॥

श्रम

बीजों को बो सकता है।

॥

तट

पाने की चरम चाह में

॥

मन

नौका ने पाल तानकर

॥

भरे

जलधि को

॥

लाँघ

लिया।

॥

दीप

देखकर तूफां अपना

॥

रुख

बदले, यह नहीं असंभव।

॥

घोर

तिमिर से ही तो होता

॥

बलशाली

किरणों का उद्भव!

॥

कर्म-ज्योति

का

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗