कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३१ / १६३ № 31 of 163 रचना ३१ / १६३
३० अगस्त २०१३ 30 August 2013 ३० अगस्त २०१३

मौसम बदला, गीत सलोने mausam badalaa, geet salone मौसम बदला, गीत सलोने

मौसम बदला,गीत सलोने

बिखरे चारों ओर। मन पतंग को लगे उड़ानेउत्सव लेकर डोर!समाचार हैं

बिछे लान मेंशतरंजी बाज़ी बगान मेंचुस्की चाय, कहकहे काफीसहेलियों

के झुरमुट झाँकी

मंद-मंद है पवन सुहानीरस भीगी है भोर!झाँक

रहा कोहरे का दामनशीतलता से सिहरा आँगन

त्योहारों के मौसम आएखील-बताशे सबको भाए।

दीप देहरी खूब सजेंगेनाच रहे मनमोर!

-कल्पना रामानी

mausam badalaa,geet salone

bikhare chaaron or man patang ko lage udaaneutsaw lekar dor!samaachaar hain

biche laan menshataranjee baazee bagaan menchuskee chaay, kahakahe kaapheesaheliyon

ke jhuramut jhaankee

mand-mand hai pawan suhaaneeras bheegee hai bhor!jhaank

rahaa kohare kaa daamanasheetalataa se siharaa aangan

tyohaaron ke mausam aaekheel-bataashe sabako bhaae

deep deharee khoob sajengenaach rahe manamor!

-kalpanaa raamaanee

मौसम बदला,गीत सलोने

बिखरे चारों ओर। मन पतंग को लगे उड़ानेउत्सव लेकर डोर!समाचार हैं

बिछे लान मेंशतरंजी बाज़ी बगान मेंचुस्की चाय, कहकहे काफीसहेलियों

के झुरमुट झाँकी

मंद-मंद है पवन सुहानीरस भीगी है भोर!झाँक

रहा कोहरे का दामनशीतलता से सिहरा आँगन

त्योहारों के मौसम आएखील-बताशे सबको भाए।

दीप देहरी खूब सजेंगेनाच रहे मनमोर!

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗