खुलीं पलकें भोर की khuleen palaken bhor kee खुलीं पलकें भोर की
खुलीं
पलकें भोर की पग
बढ़
चले लय में हमारे।
हरित
कुसुमित क्यारियाँ हैं
इस
किनारे-उस किनारे।
अरुणिमा
प्राची में छाई
धूप
शबनम से नहाई।
चाँद
तारे कह गए हम
जा
रहे हैं, दो विदाई।
कान
में कहतीं हवाएँ
नज़र
कर लो सब नज़ारे।
खिलीं
कलियाँ हुई आहट
तितलियों
की सुगबुगाहट।
पुष्प
पल्लव औ लताओं
के
लबों पर मुस्कुराहट।
सृष्टि
के साथी सभी हैं
सजग
स्वागत में हमारे।
बाग
में बच्चों की तानें
विहग
वृंदों
khuleen
palaken bhor kee pag
bढ़
chale lay men hamaare
harit
kusumit kyaariyaan hain
is
kinaare-us kinaare
arunimaa
praachee men chaaee
dhoop
shabanam se nahaaee
chaand
taare kah gae ham
jaa
rahe hain, do widaaee
kaan
men kahateen hawaaen
nazar
kar lo sab nazaare
khileen
kaliyaan huee aahat
titaliyon
kee sugabugaahat
pushp
pallaw au lataaon
ke
labon par muskuraahat
sriishti
ke saathee sabhee hain
sajag
svaagat men hamaare
baag
men bachchon kee taanen
wihag
wriindon
खुलीं
पलकें भोर की पग
बढ़
चले लय में हमारे।
हरित
कुसुमित क्यारियाँ हैं
इस
किनारे-उस किनारे।
अरुणिमा
प्राची में छाई
धूप
शबनम से नहाई।
चाँद
तारे कह गए हम
जा
रहे हैं, दो विदाई।
कान
में कहतीं हवाएँ
नज़र
कर लो सब नज़ारे।
खिलीं
कलियाँ हुई आहट
तितलियों
की सुगबुगाहट।
पुष्प
पल्लव औ लताओं
के
लबों पर मुस्कुराहट।
सृष्टि
के साथी सभी हैं
सजग
स्वागत में हमारे।
बाग
में बच्चों की तानें
विहग
वृंदों