कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २६ / १६३ № 26 of 163 रचना २६ / १६३
१० अगस्त २०१३ 10 August 2013 १० अगस्त २०१३

खुलीं पलकें भोर की khuleen palaken bhor kee खुलीं पलकें भोर की

खुलीं

पलकें भोर की पग

बढ़

चले लय में हमारे।

हरित

कुसुमित क्यारियाँ हैं

इस

किनारे-उस किनारे।

अरुणिमा

प्राची में छाई

धूप

शबनम से नहाई।

चाँद

तारे कह गए हम

जा

रहे हैं, दो विदाई।

कान

में कहतीं हवाएँ

नज़र

कर लो सब नज़ारे।

खिलीं

कलियाँ हुई आहट

तितलियों

की सुगबुगाहट।

पुष्प

पल्लव औ लताओं

के

लबों पर मुस्कुराहट।

सृष्टि

के साथी सभी हैं

सजग

स्वागत में हमारे।

बाग

में बच्चों की तानें

विहग

वृंदों

khuleen

palaken bhor kee pag

bढ़

chale lay men hamaare

harit

kusumit kyaariyaan hain

is

kinaare-us kinaare

·

arunimaa

praachee men chaaee

dhoop

shabanam se nahaaee

chaand

taare kah gae ham

jaa

rahe hain, do widaaee

·

kaan

men kahateen hawaaen

nazar

kar lo sab nazaare

·

khileen

kaliyaan huee aahat

titaliyon

kee sugabugaahat

pushp

pallaw au lataaon

ke

labon par muskuraahat

·

sriishti

ke saathee sabhee hain

sajag

svaagat men hamaare

·

baag

men bachchon kee taanen

wihag

wriindon

खुलीं

पलकें भोर की पग

बढ़

चले लय में हमारे।

हरित

कुसुमित क्यारियाँ हैं

इस

किनारे-उस किनारे।

अरुणिमा

प्राची में छाई

धूप

शबनम से नहाई।

चाँद

तारे कह गए हम

जा

रहे हैं, दो विदाई।

कान

में कहतीं हवाएँ

नज़र

कर लो सब नज़ारे।

खिलीं

कलियाँ हुई आहट

तितलियों

की सुगबुगाहट।

पुष्प

पल्लव औ लताओं

के

लबों पर मुस्कुराहट।

सृष्टि

के साथी सभी हैं

सजग

स्वागत में हमारे।

बाग

में बच्चों की तानें

विहग

वृंदों

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗