कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४४ / १६३ № 44 of 163 रचना ४४ / १६३
१३ नवम्बर २०१३ 13 November 2013 १३ नवम्बर २०१३

पापा तुम्हारे लिए paapaa tumhaare lie पापा तुम्हारे लिए

मन मेरा करता है पापा

काव्य ग्रंथ रच डालूँ।

माँ पर बहुत लिखा बहुतों ने

मैं तुमको लिख डालूँ।

माँ महान है माना मैंने

तुम महानतम पापा।

सबसे सुंदर माँ है जग में

तुम सुंदरतम पापा।

गृहस्थी के इस फूलदान में

प्यारे पुष्प सजा लूँ।

अपने हाथों सींचूँ बगिया

स्वर्ग समान बना लूँ।

छिपने को है माँ का आँचल

वरना बचपन फीका

गर्व से तनकर कदम बढ़ाना

पापा तुमसे सीखा।

साथ बढ़ूँ मैं सदा तुम्हारे

man meraa karataa hai paapaa

kaavy granth rach daaloon

maan par bahut likhaa bahuton ne

main tumako likh daaloon

·

maan mahaan hai maanaa mainne

tum mahaanatam paapaa

sabase sundar maan hai jag men

tum sundaratam paapaa

griihasthee ke is phooladaan men

pyaare pushp sajaa loon

apane haathon seenchoon bagiyaa

svarg samaan banaa loon

·

chipane ko hai maan kaa aanchal

waranaa bachapan pheekaa

garv se tanakar kadam bढ़aanaa

paapaa tumase seekhaa

saath bढ़oon main sadaa tumhaare

मन मेरा करता है पापा

काव्य ग्रंथ रच डालूँ।

माँ पर बहुत लिखा बहुतों ने

मैं तुमको लिख डालूँ।

माँ महान है माना मैंने

तुम महानतम पापा।

सबसे सुंदर माँ है जग में

तुम सुंदरतम पापा।

गृहस्थी के इस फूलदान में

प्यारे पुष्प सजा लूँ।

अपने हाथों सींचूँ बगिया

स्वर्ग समान बना लूँ।

छिपने को है माँ का आँचल

वरना बचपन फीका

गर्व से तनकर कदम बढ़ाना

पापा तुमसे सीखा।

साथ बढ़ूँ मैं सदा तुम्हारे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗