कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २१ / २०४ № 21 of 204 रचना २१ / २०४
१ दिसम्बर २०१३ 1 December 2013 १ दिसम्बर २०१३

मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो meraa pyaar mujhase judaa n ho मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो

मेरी

एक छोटी सी भूल की,

है ये इल्तिज़ा कि सज़ा न हो।

जो

सज़ा भी हो तो मेरे खुदा, मेरा

प्यार मुझसे जुदा न हो।

बिना

उसके फीके हैं राग सब,

न लुभाती कोई भी रागिनी

है

अधूरा सुर मेरे गीत का,

जहाँ साथ उसका मिला न हो।

वो

नहीं अगर मेरे पास तो, कटे

तारे गिन मेरी हर निशा

कोई

पल गुज़रता नहीं कि जब, उसे

याद मैंने किया न हो।

मैं

हूँ सोचती बनूँ मानिनी,

वो मनाए मुझको बस एक बार

है ये डर मगर कि मेरी तरह,

कहीं वो भी ज़िद पे अड़ा न हो।

नहीं

गम मुझे मेरे मन को वो, क्यों

न आज तक है समझ सका

मेरा

मन तो है यही चाहता, कभी

मुझसे उसको गिला न हो।

उसे

ढूँढते ढली साँझ ये, तो भी आस की है किरण अभी

इन अँधेरों में मुझे थामने, किसी ओट में वो छिपा न हो।

है

तमन्ना बस यही “कल्पना”,

वो नज़र में हो जियूँ या मरूँ

नहीं

मुक्त होगी ये रूह भी,

जो उसी के हाथों विदा न हो।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

meree

ek chotee see bhool kee,

hai ye iltizaa ki sazaa n ho

·

jo

sazaa bhee ho to mere khudaa, meraa

pyaar mujhase judaa n ho

·

binaa

usake pheeke hain raag sab,

n lubhaatee koee bhee raaginee

·

hai

adhooraa sur mere geet kaa,

jahaan saath usakaa milaa n ho

·

wo

naheen agar mere paas to, kate

taare gin meree har nishaa

·

koee

pal guzarataa naheen ki jab, use

yaad mainne kiyaa n ho

·

main

hoon sochatee banoon maaninee,

wo manaae mujhako bas ek baar

·

hai ye dar magar ki meree tarah,

kaheen wo bhee zid pe adaa n ho

·

naheen

gam mujhe mere man ko wo, kyon

n aaj tak hai samajh sakaa

·

meraa

man to hai yahee chaahataa, kabhee

mujhase usako gilaa n ho

·

use

dhoondhate dhalee saanjh ye, to bhee aas kee hai kiran abhee

·

in andheron men mujhe thaamane, kisee ot men wo chipaa n ho

·

hai

tamannaa bas yahee “kalpanaa”,

wo nazar men ho jiyoon yaa maroon

·

naheen

mukt hogee ye rooh bhee,

jo usee ke haathon widaa n ho

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मेरी

एक छोटी सी भूल की,

है ये इल्तिज़ा कि सज़ा न हो।

जो

सज़ा भी हो तो मेरे खुदा, मेरा

प्यार मुझसे जुदा न हो।

बिना

उसके फीके हैं राग सब,

न लुभाती कोई भी रागिनी

है

अधूरा सुर मेरे गीत का,

जहाँ साथ उसका मिला न हो।

वो

नहीं अगर मेरे पास तो, कटे

तारे गिन मेरी हर निशा

कोई

पल गुज़रता नहीं कि जब, उसे

याद मैंने किया न हो।

मैं

हूँ सोचती बनूँ मानिनी,

वो मनाए मुझको बस एक बार

है ये डर मगर कि मेरी तरह,

कहीं वो भी ज़िद पे अड़ा न हो।

नहीं

गम मुझे मेरे मन को वो, क्यों

न आज तक है समझ सका

मेरा

मन तो है यही चाहता, कभी

मुझसे उसको गिला न हो।

उसे

ढूँढते ढली साँझ ये, तो भी आस की है किरण अभी

इन अँधेरों में मुझे थामने, किसी ओट में वो छिपा न हो।

है

तमन्ना बस यही “कल्पना”,

वो नज़र में हो जियूँ या मरूँ

नहीं

मुक्त होगी ये रूह भी,

जो उसी के हाथों विदा न हो।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗