कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४५ / १६४ № 45 of 164 रचना ४५ / १६४
२ दिसम्बर २०१३ 2 December 2013 २ दिसम्बर २०१३

बेबस कमली bebas kamalee बेबस कमली

बिखर चुकी है बेबस कमली

॥

खोकर अपनी खरी कमाई।

॥

मुद्दत से करती आई वो

॥

एक बड़े घर के सब काम।

॥

पा जाती थी रूखी-सूखी

॥

त्यौहारों पर अलग इनाम।

॥

आज न जाने किस गुमान में

॥

पहुँच गई वो बिना नहाई।

॥

जल विहीन घट रहते अक्सर

॥

नल से बूँदें

अंतर्ध्यान।

॥

कभी प्यास से कण्ठ सूखते

॥

कभी छूटता वांछित स्नान।

॥

काले तन पर मैली धोती

॥

देख मालकिन थी गुर्राई।

॥

रूठी किस्मत, टूटी हिम्मत

॥

ध्वस्त हुए

bikhar chukee hai bebas kamalee

·

khokar apanee kharee kamaaee

·

muddat se karatee aaee wo

·

ek bade ghar ke sab kaam

·

paa jaatee thee rookhee-sookhee

·

tyauhaaron par alag inaam

·

aaj n jaane kis gumaan men

·

pahunch gaee wo binaa nahaaee

·

jal wiheen ghat rahate aksar

·

nal se boonden

antardhyaan

·

kabhee pyaas se kanth sookhate

·

kabhee chootataa waanchit snaan

·

kaale tan par mailee dhotee

·

dekh maalakin thee gurraaee

·

roothee kismat, tootee himmat

·

dhvast hue

बिखर चुकी है बेबस कमली

॥

खोकर अपनी खरी कमाई।

॥

मुद्दत से करती आई वो

॥

एक बड़े घर के सब काम।

॥

पा जाती थी रूखी-सूखी

॥

त्यौहारों पर अलग इनाम।

॥

आज न जाने किस गुमान में

॥

पहुँच गई वो बिना नहाई।

॥

जल विहीन घट रहते अक्सर

॥

नल से बूँदें

अंतर्ध्यान।

॥

कभी प्यास से कण्ठ सूखते

॥

कभी छूटता वांछित स्नान।

॥

काले तन पर मैली धोती

॥

देख मालकिन थी गुर्राई।

॥

रूठी किस्मत, टूटी हिम्मत

॥

ध्वस्त हुए

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗