कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४५ / १६३ № 45 of 163 रचना ४५ / १६३
२ दिसम्बर २०१३ 2 December 2013 २ दिसम्बर २०१३

बेबस कमली bebas kamalee बेबस कमली

बिखर चुकी है बेबस कमली

खोकर अपनी खरी कमाई।

मुद्दत से करती आई वो

एक बड़े घर के सब काम।

पा जाती थी रूखी-सूखी

त्यौहारों पर अलग इनाम।

आज न जाने किस गुमान में

पहुँच गई वो बिना नहाई।

जल विहीन घट रहते अक्सर

नल से बूँदें

अंतर्ध्यान।

कभी प्यास से कण्ठ सूखते

कभी छूटता वांछित स्नान।

काले तन पर मैली धोती

देख मालकिन थी गुर्राई।

रूठी किस्मत, टूटी हिम्मत

ध्वस्त हुए

bikhar chukee hai bebas kamalee

·

khokar apanee kharee kamaaee

·

muddat se karatee aaee wo

·

ek bade ghar ke sab kaam

·

paa jaatee thee rookhee-sookhee

·

tyauhaaron par alag inaam

·

aaj n jaane kis gumaan men

·

pahunch gaee wo binaa nahaaee

·

jal wiheen ghat rahate aksar

·

nal se boonden

antardhyaan

·

kabhee pyaas se kanth sookhate

·

kabhee chootataa waanchit snaan

·

kaale tan par mailee dhotee

·

dekh maalakin thee gurraaee

·

roothee kismat, tootee himmat

·

dhvast hue

बिखर चुकी है बेबस कमली

खोकर अपनी खरी कमाई।

मुद्दत से करती आई वो

एक बड़े घर के सब काम।

पा जाती थी रूखी-सूखी

त्यौहारों पर अलग इनाम।

आज न जाने किस गुमान में

पहुँच गई वो बिना नहाई।

जल विहीन घट रहते अक्सर

नल से बूँदें

अंतर्ध्यान।

कभी प्यास से कण्ठ सूखते

कभी छूटता वांछित स्नान।

काले तन पर मैली धोती

देख मालकिन थी गुर्राई।

रूठी किस्मत, टूटी हिम्मत

ध्वस्त हुए

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗