रात रानी चंद्रिका raat raanee chandrikaa रात रानी चंद्रिका
शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।
तन
सितारों से सजाकर,
भू पे उतरी चंद्रिका।
चाँद
ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में
झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।
पात
झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली
पाश
में ले हर कली को,
चूम चहकी चंद्रिका।
घन
घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,
जब
धरा पर शीत बदरी,
बन के बरसी चंद्रिका।
पर्वतों
से, वादियों से, पाख भर मिलती रही
सागरों
की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।
प्राणियों
में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर
प्रेमियों
सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।
हर
कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही
शबनमी
प्रातः में चल दी,
भाव भीगी चंद्रिका।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
shubhr wasanaa dugdh see, man mugdh karatee chandrikaa
tan
sitaaron se sajaakar,
bhoo pe utaree chandrikaa
chaand
ne jab burj se, jhaankaa bhuwan kee jheel men
jhilamilaatee sang aaee, sard sajanee chandrikaa
paat
jhoomen, pushp harashe, raat ne angadaaee lee
paash
men le har kalee ko,
choom chahakee chandrikaa
ghan
ghanere, aasamaan se, chod deraa chip gae,
jab
dharaa par sheet badaree,
ban ke barasee chandrikaa
parvaton
se, waadiyon se, paakh bhar milatee rahee
saagaron
kee har lahar se, khoob khelee chandrikaa
praaniyon
men prem boyaa, har kiran se seenchakar
premiyon
sang gunagunaaee, raat raanee chandrikaa
har
kalam kee ban gazal, shab bhar saphar karatee rahee
shabanamee
praatah men chal dee,
bhaaw bheegee chandrikaa
-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।
तन
सितारों से सजाकर,
भू पे उतरी चंद्रिका।
चाँद
ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में
झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।
पात
झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली
पाश
में ले हर कली को,
चूम चहकी चंद्रिका।
घन
घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,
जब
धरा पर शीत बदरी,
बन के बरसी चंद्रिका।
पर्वतों
से, वादियों से, पाख भर मिलती रही
सागरों
की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।
प्राणियों
में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर
प्रेमियों
सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।
हर
कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही
शबनमी
प्रातः में चल दी,
भाव भीगी चंद्रिका।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी