कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २२ / २०४ № 22 of 204 रचना २२ / २०४
२ दिसम्बर २०१३ 2 December 2013 २ दिसम्बर २०१३

रात रानी चंद्रिका raat raanee chandrikaa रात रानी चंद्रिका

शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन

सितारों से सजाकर,

भू पे उतरी चंद्रिका।

चाँद

ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।

पात

झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली

पाश

में ले हर कली को,

चूम चहकी चंद्रिका।

घन

घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,

जब

धरा पर शीत बदरी,

बन के बरसी चंद्रिका।

पर्वतों

से, वादियों से, पाख भर मिलती रही

सागरों

की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।

प्राणियों

में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर

प्रेमियों

सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।

हर

कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही

शबनमी

प्रातः में चल दी,

भाव भीगी चंद्रिका।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

shubhr wasanaa dugdh see, man mugdh karatee chandrikaa

·

tan

sitaaron se sajaakar,

bhoo pe utaree chandrikaa

·

chaand

ne jab burj se, jhaankaa bhuwan kee jheel men

·

jhilamilaatee sang aaee, sard sajanee chandrikaa

·

paat

jhoomen, pushp harashe, raat ne angadaaee lee

·

paash

men le har kalee ko,

choom chahakee chandrikaa

·

ghan

ghanere, aasamaan se, chod deraa chip gae,

·

jab

dharaa par sheet badaree,

ban ke barasee chandrikaa

·

parvaton

se, waadiyon se, paakh bhar milatee rahee

·

saagaron

kee har lahar se, khoob khelee chandrikaa

·

praaniyon

men prem boyaa, har kiran se seenchakar

·

premiyon

sang gunagunaaee, raat raanee chandrikaa

·

har

kalam kee ban gazal, shab bhar saphar karatee rahee

·

shabanamee

praatah men chal dee,

bhaaw bheegee chandrikaa

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन

सितारों से सजाकर,

भू पे उतरी चंद्रिका।

चाँद

ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।

पात

झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली

पाश

में ले हर कली को,

चूम चहकी चंद्रिका।

घन

घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,

जब

धरा पर शीत बदरी,

बन के बरसी चंद्रिका।

पर्वतों

से, वादियों से, पाख भर मिलती रही

सागरों

की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।

प्राणियों

में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर

प्रेमियों

सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।

हर

कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही

शबनमी

प्रातः में चल दी,

भाव भीगी चंद्रिका।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗