कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २३ / २०५ № 23 of 205 रचना २३ / २०५
२ दिसम्बर २०१३ 2 December 2013 २ दिसम्बर २०१३

रात रानी चंद्रिका raat raanee chandrikaa रात रानी चंद्रिका

शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।

॥

तन

सितारों से सजाकर,

भू पे उतरी चंद्रिका।

॥

चाँद

ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में

॥

झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।

॥

पात

झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली

॥

पाश

में ले हर कली को,

चूम चहकी चंद्रिका।

॥

घन

घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,

॥

जब

धरा पर शीत बदरी,

बन के बरसी चंद्रिका।

॥

पर्वतों

से, वादियों से, पाख भर मिलती रही

॥

सागरों

की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।

॥

प्राणियों

में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर

॥

प्रेमियों

सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।

॥

हर

कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही

॥

शबनमी

प्रातः में चल दी,

भाव भीगी चंद्रिका।

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

shubhr wasanaa dugdh see, man mugdh karatee chandrikaa

·

tan

sitaaron se sajaakar,

bhoo pe utaree chandrikaa

·

chaand

ne jab burj se, jhaankaa bhuwan kee jheel men

·

jhilamilaatee sang aaee, sard sajanee chandrikaa

·

paat

jhoomen, pushp harashe, raat ne angadaaee lee

·

paash

men le har kalee ko,

choom chahakee chandrikaa

·

ghan

ghanere, aasamaan se, chod deraa chip gae,

·

jab

dharaa par sheet badaree,

ban ke barasee chandrikaa

·

parvaton

se, waadiyon se, paakh bhar milatee rahee

·

saagaron

kee har lahar se, khoob khelee chandrikaa

·

praaniyon

men prem boyaa, har kiran se seenchakar

·

premiyon

sang gunagunaaee, raat raanee chandrikaa

·

har

kalam kee ban gazal, shab bhar saphar karatee rahee

·

shabanamee

praatah men chal dee,

bhaaw bheegee chandrikaa

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका।

॥

तन

सितारों से सजाकर,

भू पे उतरी चंद्रिका।

॥

चाँद

ने जब बुर्ज से, झाँका भुवन की झील में

॥

झिलमिलाती संग आई, सर्द सजनी चंद्रिका।

॥

पात

झूमें, पुष्प हरषे, रात ने अंगड़ाई ली

॥

पाश

में ले हर कली को,

चूम चहकी चंद्रिका।

॥

घन

घनेरे, आसमाँ से, छोड़ डेरा छिप गए,

॥

जब

धरा पर शीत बदरी,

बन के बरसी चंद्रिका।

॥

पर्वतों

से, वादियों से, पाख भर मिलती रही

॥

सागरों

की हर लहर से, खूब खेली चंद्रिका।

॥

प्राणियों

में प्रेम बोया, हर किरण से सींचकर

॥

प्रेमियों

सँग गुनगुनाई, रात रानी चंद्रिका।

॥

हर

कलम की बन ग़ज़ल, शब भर सफर करती रही

॥

शबनमी

प्रातः में चल दी,

भाव भीगी चंद्रिका।

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗