फिर वही बचपन सुहाना चाहिए phir wahee bachapan suhaanaa chaahie फिर वही बचपन सुहाना चाहिए
फिर वही बचपन
मुझको तो गुज़रा ज़माना चाहिए।
फिर वही बचपन सुहाना चाहिए।
जिस जगह उनसे मिली पहली दफा
उस गली का वो मुहाना चाहिए।
तैरती हों दुम हिलातीं मछलियाँ
वो पुनः पोखर पुराना चाहिए।
चुभ रही आबोहवा शहरी बहुत
गाँव में इक आशियाना चाहिए।
भीड़ कोलाहल भरा ये कारवाँ
छोड़ जाने का बहाना चाहिए।
सागरों की रेत से अब जी भरा
घाट-पनघट खिलखिलाना चाहिए।
घुट रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!
व्योम में उड़ता तराना चाहिए।
थम न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’
गीत गज़लों का खज़ाना चाहिए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
phir wahee bachapan
mujhako to guzaraa zamaanaa chaahie
phir wahee bachapan suhaanaa chaahie
jis jagah unase milee pahalee daphaa
us galee kaa wo muhaanaa chaahie
tairatee hon dum hilaateen machaliyaan
wo punah pokhar puraanaa chaahie
chubh rahee aabohawaa shaharee bahut
gaanv men ik aashiyaanaa chaahie
bheed kolaahal bharaa ye kaarawaan
chod jaane kaa bahaanaa chaahie
saagaron kee ret se ab jee bharaa
ghaat-panaghat khilakhilaanaa chaahie
ghut rahaa dam band pinjadon men khudaa!
wyom men udataa taraanaa chaahie
tham n jaae yah kalam hee ‘kalpanaa’
geet gazalon kaa khazaanaa chaahie
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
फिर वही बचपन
मुझको तो गुज़रा ज़माना चाहिए।
फिर वही बचपन सुहाना चाहिए।
जिस जगह उनसे मिली पहली दफा
उस गली का वो मुहाना चाहिए।
तैरती हों दुम हिलातीं मछलियाँ
वो पुनः पोखर पुराना चाहिए।
चुभ रही आबोहवा शहरी बहुत
गाँव में इक आशियाना चाहिए।
भीड़ कोलाहल भरा ये कारवाँ
छोड़ जाने का बहाना चाहिए।
सागरों की रेत से अब जी भरा
घाट-पनघट खिलखिलाना चाहिए।
घुट रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!
व्योम में उड़ता तराना चाहिए।
थम न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’
गीत गज़लों का खज़ाना चाहिए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --