हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम) ham apanee kahaanee kah denge{prem) हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम)
सोचा है यही उससे मिलकर
हर बात पुरानी कह देंगे।
जो बीत चुकी अब तक हम पर
खुद अपनी जुबानी कह देंगे।
मिल जाए अगर वो राहों में
हो गहरा प्रेम निगाहों में
इस बार हमें प्रिय दे जाओ
कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।
यदि उसने सुख-दुख पूछा तो
कुछ अपना हाल सुनाया तो
तुम बिन अब हमको लगती है
यह दुनिया फ़ानी, कह देंगे।
ले नाम उसी का फिरते हैं
यादों पे गुज़ारा करते हैं
मिलना न हुआ तो लोग हमें
पगली दीवानी, कह देंगे।
बेदर्द दिलों की भीड़ यहाँ
कहीं और बसाएँ एक जहाँ
अब संग तुम्हारे ही हमको
यह उम्र बितानी, कह देंगे।
माना कि लबों पर बोल नहीं
पर हैं इन्सां, पाषाण नहीं।
लब से न सही, नैनों से ही
हम अपनी कहानी, कह देंगे।
यदि हमसे वो कर ले वादा
यह जीवन साथ बिताने का
तो शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं
कुछ और निभानी, कह देंगे।
sochaa hai yahee usase milakar
har baat puraanee kah denge
jo beet chukee ab tak ham par
khud apanee jubaanee kah denge
mil jaae agar wo raahon men
ho gaharaa prem nigaahon men
is baar hamen priy de jaao
kuch neh-nishaanee, kah denge
yadi usane sukh-dukh poochaa to
kuch apanaa haal sunaayaa to
tum bin ab hamako lagatee hai
yah duniyaa faanee, kah denge
le naam usee kaa phirate hain
yaadon pe guzaaraa karate hain
milanaa n huaa to log hamen
pagalee deewaanee, kah denge
bedard dilon kee bheed yahaan
kaheen aur basaaen ek jahaan
ab sang tumhaare hee hamako
yah umr bitaanee, kah denge
maanaa ki labon par bol naheen
par hain insaan, paashaan naheen
lab se n sahee, nainon se hee
ham apanee kahaanee, kah denge
yadi hamase wo kar le waadaa
yah jeewan saath bitaane kaa
to shesh ‘kalpanaa’ rasm naheen
kuch aur nibhaanee, kah denge
सोचा है यही उससे मिलकर
हर बात पुरानी कह देंगे।
जो बीत चुकी अब तक हम पर
खुद अपनी जुबानी कह देंगे।
मिल जाए अगर वो राहों में
हो गहरा प्रेम निगाहों में
इस बार हमें प्रिय दे जाओ
कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।
यदि उसने सुख-दुख पूछा तो
कुछ अपना हाल सुनाया तो
तुम बिन अब हमको लगती है
यह दुनिया फ़ानी, कह देंगे।
ले नाम उसी का फिरते हैं
यादों पे गुज़ारा करते हैं
मिलना न हुआ तो लोग हमें
पगली दीवानी, कह देंगे।
बेदर्द दिलों की भीड़ यहाँ
कहीं और बसाएँ एक जहाँ
अब संग तुम्हारे ही हमको
यह उम्र बितानी, कह देंगे।
माना कि लबों पर बोल नहीं
पर हैं इन्सां, पाषाण नहीं।
लब से न सही, नैनों से ही
हम अपनी कहानी, कह देंगे।
यदि हमसे वो कर ले वादा
यह जीवन साथ बिताने का
तो शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं
कुछ और निभानी, कह देंगे।