कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५५ / २०४ № 155 of 204 रचना १५५ / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम) ham apanee kahaanee kah denge{prem) हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम)

सोचा है यही उससे मिलकर

हर बात पुरानी कह देंगे।

जो बीत चुकी अब तक हम पर

खुद अपनी जुबानी कह देंगे।

मिल जाए अगर वो राहों में

हो गहरा प्रेम निगाहों में

इस बार हमें प्रिय दे जाओ

कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।

यदि उसने सुख-दुख पूछा तो

कुछ अपना हाल सुनाया तो

तुम बिन अब हमको लगती है

यह दुनिया फ़ानी, कह देंगे।

ले नाम उसी का फिरते हैं

यादों पे गुज़ारा करते हैं

मिलना न हुआ तो लोग हमें

पगली दीवानी, कह देंगे।

बेदर्द दिलों की भीड़ यहाँ

कहीं और बसाएँ एक जहाँ

अब संग तुम्हारे ही हमको

यह उम्र बितानी, कह देंगे।

माना कि लबों पर बोल नहीं

पर हैं इन्सां, पाषाण नहीं।

लब से न सही, नैनों से ही

हम अपनी कहानी, कह देंगे।

यदि हमसे वो कर ले वादा

यह जीवन साथ बिताने का

तो शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं

कुछ और निभानी, कह देंगे।

sochaa hai yahee usase milakar

har baat puraanee kah denge

jo beet chukee ab tak ham par

khud apanee jubaanee kah denge

·

mil jaae agar wo raahon men

ho gaharaa prem nigaahon men

is baar hamen priy de jaao

kuch neh-nishaanee, kah denge

·

yadi usane sukh-dukh poochaa to

kuch apanaa haal sunaayaa to

tum bin ab hamako lagatee hai

yah duniyaa faanee, kah denge

·

le naam usee kaa phirate hain

yaadon pe guzaaraa karate hain

milanaa n huaa to log hamen

pagalee deewaanee, kah denge

·

bedard dilon kee bheed yahaan

kaheen aur basaaen ek jahaan

ab sang tumhaare hee hamako

yah umr bitaanee, kah denge

·

maanaa ki labon par bol naheen

par hain insaan, paashaan naheen

lab se n sahee, nainon se hee

ham apanee kahaanee, kah denge

·

yadi hamase wo kar le waadaa

yah jeewan saath bitaane kaa

to shesh ‘kalpanaa’ rasm naheen

kuch aur nibhaanee, kah denge

सोचा है यही उससे मिलकर

हर बात पुरानी कह देंगे।

जो बीत चुकी अब तक हम पर

खुद अपनी जुबानी कह देंगे।

मिल जाए अगर वो राहों में

हो गहरा प्रेम निगाहों में

इस बार हमें प्रिय दे जाओ

कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।

यदि उसने सुख-दुख पूछा तो

कुछ अपना हाल सुनाया तो

तुम बिन अब हमको लगती है

यह दुनिया फ़ानी, कह देंगे।

ले नाम उसी का फिरते हैं

यादों पे गुज़ारा करते हैं

मिलना न हुआ तो लोग हमें

पगली दीवानी, कह देंगे।

बेदर्द दिलों की भीड़ यहाँ

कहीं और बसाएँ एक जहाँ

अब संग तुम्हारे ही हमको

यह उम्र बितानी, कह देंगे।

माना कि लबों पर बोल नहीं

पर हैं इन्सां, पाषाण नहीं।

लब से न सही, नैनों से ही

हम अपनी कहानी, कह देंगे।

यदि हमसे वो कर ले वादा

यह जीवन साथ बिताने का

तो शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं

कुछ और निभानी, कह देंगे।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗